पुणे, 9 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के नागपुर में महावितरण ने बिजली की बर्बादी को रोककर बिजली के नुकसान को नियंत्रित करने और ईमानदार उपभोक्ताओं को बिना रुकावट, उच्च गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है।
इस विशेष अभियान के तहत 1 से 9 सितंबर तक महज नौ दिनों में जिले के विभिन्न हिस्सों में की गई कार्रवाई में कुल 460 बिजली चोरी का पर्दाफाश किया गया है। महावितरण के स्थानीय इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा की गई इस कार्रवाई ने अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वालों को डरा दिया है।
राज्यभर में चलाए जा रहे इस निरीक्षण अभियान के तहत कर्मचारियों ने शहरी, ग्रामीण, औद्योगिक क्षेत्रों और वाणिज्यिक केंद्रों में बिजली मीटरों और कनेक्शनों का गहन निरीक्षण किया। इस अभियान में नागपुर जिले के शहरी क्षेत्र में 270 और नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में 190 सहित कुल 460 बिजली चोरी के मामले सामने आए।
इसमें नागपुर शहर मंडल के बुटीबोरी मंडल में 72 मामले, महल मंडल में 65, सिविल लाइंस मंडल में 53, कांग्रेस नगर मंडल में 48 और गांधीबाग मंडल में 32 मामले शामिल हैं। इसके अलावा, नागपुर ग्रामीण मंडल के मौदा मंडल में 60, उमरेड मंडल में 58, साओनेर मंडल में 46 और कटोल मंडल में 26 बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं।
इस निरीक्षण के दौरान मुख्य बिजली लाइन पर सीधे हुक लगाकर बिजली लेना, मीटर को बाईपास करना, सील से छेड़छाड़ करना, मीटर की गति धीमी करना या डिजिटल डिस्प्ले को बाईपास करना जैसी अवैध गतिविधियां पकड़ी गई हैं। घरेलू उपयोग के अलावा, इस अभियान में कुछ व्यावसायिक संगठनों और छोटे उद्योगों में भी अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है।
सामने आए मामलों में चोरी की गई बिजली का सटीक आकलन और जुर्माने के बिल तैयार करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 और 138 के तहत दोषी पाए गए उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त आपराधिक और दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। जुर्माना अदा करने में आनाकानी करने वालों के खिलाफ सीधे पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की जा रही है और कई स्थानों पर बिजली की आपूर्ति तत्काल काट दी गई है।
महाराष्ट्र वितरण निगम (एमडीसीसी) प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत कनेक्शनों के माध्यम से ही सुरक्षित बिजली का उपयोग करें, न कि किसी अवैध माध्यम से। इसके साथ ही यदि क्षेत्र में बिजली चोरी होते हुए दिखाई दे, तो नागरिकों को एमडीसीसी के साथ सहयोग करना चाहिए और सूचना देनी चाहिए। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
--आईएएनएस
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