नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 137वें एपिसोड में नागालैंड की वेसालु पुरो और ओडिशा की मैथिली भुए का जिक्र किया। वेसालु ने फूलों की खेती के जरिए अपनी पहचान बनाई है, वहीं, मैथिली भुए जंगल के संरक्षण में अहम योगदान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारे गांव हो या शहर, हमारी नदियां हों या तीर्थस्थल। इनकी पहचान हमारे व्यवहार से भी बनती है। और जब स्वच्छता इस व्यवहार में शामिल हो जाती है, उस स्थान की शोभा और बढ़ जाती है। कभी–कभी हमारा एक छोटा सा शौक, जीवन में एक बड़ी संभावना का रास्ता खोल देता है। नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है।"
पीएम मोदी ने कहा, "वेसालुलु किसान परिवार में पली-बढ़ीं। बचपन से उन्होंने अपने माता–पिता को खेती करते देखा था और उन्हें खुद फूलों से बहुत लगाव था। साल 2021 में उन्होंने इसी शौक के साथ छोटे स्तर पर फूल उगाने की शुरुआत की। धीरे–धीरे उन्हें इसमें एक संभावना दिखाई देने लगी। उन्होंने देखा कि शादी-विवाह हों या फिर अन्य त्योहार, फूलों की मांग हमेशा बनी रहती है। वेसालु ने अपने इस शौक को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस सफर में उन्हें स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से फूलों की वैज्ञानिक खेती की ट्रेनिंग मिली, फिर उन्होंने केवल एक चौथाई एकड़ जमीन पर ग्लेडियोलस के हजारों पौधे लगाए। पहले ही प्रयास में 5 हजार से ज्यादा फूल खिल उठे।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ये सफलता वेसालु के लिए एक नई शुरुआत बन गई। उन्होंने फूलों की खेती को और आगे बढ़ाया। जो फूल कभी स्थानीय बाजार में रह जाते थे, आज वो नागालैंड से निकलकर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक जा रहे हैं। वेसालु पुरो की यात्रा हमें बताती है कि शौक जब मेहनत और सही मार्गदर्शन से जुड़ जाता है, तो वह नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं, जो एक छोटा सा प्रयास शुरू करते हैं और देखते-ही-देखते उनका प्रयास बहुत से लोगों के जीवन में बदलाव का रास्ता बना देता है। ओडिशा के देबरीगढ़ में एक गांव है ‘धोड़रोकुसुम’। कुछ साल पहले तक इस गांव की मैथिली भुए लगभग हर दिन जंगल जाती थीं। कभी जलावन की लकड़ी लेने, कभी महुआ और केंदु पत्ता चुनने, तो कभी बांस की कोपलें और दूसरी वन उपज लाने। उनके और वहां के अनेक परिवारों की बहुत सी जरूरतें इसी जंगल से पूरी होती थीं, लेकिन फिर मैथिली जी देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं। यहां से जंगल के साथ उनका रिश्ता एक नई दिशा में बदल गया। अब जंगल का संरक्षण भी उनकी आजीविका का माध्यम बन गया।"
पीएम मोदी ने कहा, "मैथिली के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया। आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं। कोई वन्य-जीवों की सुरक्षा का दायित्व संभाल रही है, कोई घास के मैदानों के विकास से जुड़ी है, तो कुछ महिलाएं इको-टूरिज्म गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। मैथिली और देबरीगढ़ की इन बहनों ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा भी हो सकती है और जीवन में समृद्धि भी आ सकती है। इन सभी बहनों का प्रयास हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।"
--आईएएएनएस
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