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मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम पर वीएचपी का बचाव, आलोक कुमार बोले - अभिव्यक्ति की आजादी सबके लिए

मोहन

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की कथित नई गाइडलाइंस को लेकर उठे विवाद पर वीएचपी प्रवक्ता आलोक कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संगठन ने पंडालों में शाकाहारी या मांसाहारी भोजन को लेकर न तो कोई दिशा-निर्देश जारी किया है और न ही ऐसा कोई निर्णय लिया गया है।

आलोक कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बड़े त्योहारों से पहले विश्व हिंदू परिषद विभिन्न स्थानों पर आयोजकों के साथ बैठकें करता है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल लगाने वाले कुछ लोगों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें पूजा की परंपरा, वातावरण और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा हुई। वीएचपी का सुझाव है कि देवी की पूजा पारंपरिक और शास्त्रीय विधि से हो तथा पंडालों में भक्ति, प्रेम और आनंद का वातावरण रहे। साथ ही, स्वच्छता और शुचिता का ध्यान रखा जाए। बैठक में वेज या नॉनवेज खाने को लेकर कोई चर्चा या फैसला नहीं हुआ था।

आलोक कुमार ने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के सवाल पर एक स्वामी ने खाने के स्टॉलों में स्वच्छता और शुचिता बनाए रखने को अच्छा सुझाव बताया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे संगठन की गाइडलाइन या आदेश के रूप में पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वीएचपी की ओर से सुझाव दिए जाते हैं, जिन्हें आयोजक अपनी इच्छा के अनुसार लागू करते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि करीब 8-10 साल पहले दिल्ली की रामलीला समितियों को भगवान राम के दरबार के साथ महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर या झांकी रखने का सुझाव दिया गया था और अब कई रामलीला आयोजनों में इसे अपनाया जा रहा है।

वीएचपी प्रवक्ता ने दुर्गा पूजा आयोजकों को किसी एक दिन 'वंदे मातरम' का पूरा गायन और भारत माता की पूजा करने का सुझाव देने की भी बात कही।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे और न्यूयॉर्क में प्रस्तावित ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर भी आलोक कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में करीब 5 हजार लोगों के शामिल होने की बात है और कार्यक्रम से पहले जिस तरह से विरोध और सोशल मीडिया से जुड़ा विवाद सामने आया, वह चिंता का विषय है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करने वाले लोगों को अमेरिका में भी सभी समुदायों के लिए समान स्वतंत्रता का समर्थन करना चाहिए।

आलोक कुमार ने कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन, शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता किसी एक समुदाय के लिए सीमित नहीं हो सकती। किसी विचार से सहमत या असहमत होना अलग बात है, लेकिन हर व्यक्ति को अपनी बात कहने और दूसरों को उसे सुनने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने भागवत के कार्यक्रम को रोकने की कोशिशों को लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों के पीछे किसी 'वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप' का प्रचार हो सकता है। उनका दावा किया कि अमेरिकी समाज भी इस तरह के प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगा।

स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना से जुड़े सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि उन्हें संबंधित बातचीत की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने भारतीय संस्कृति में हास्य और अभिव्यक्ति की मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि हंसी और आनंद जरूरी हैं, लेकिन किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा से बचना चाहिए। उन्होंने 'वंदे मातरम' में भारत माता के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में ऐसी अभिव्यक्ति की कल्पना की गई है, जिसमें आनंद और सौम्यता हो और किसी का अपमान न हो।

--आईएएनएस

पीएसके