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मंदिर ट्रस्ट में किन्नर संतों को जगह देने की मांग, हिमांगी सखी बोलीं- सेवा और पारदर्शिता बढ़ेगी

मंदिर

मथुरा, 10 सितंबर (आईएएनएस)। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने सनातन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। उन्होंने मंदिरों में जातिगत भेदभाव और वीआईपी कल्चर खत्म करने, मंदिर ट्रस्ट में किन्नर संतों को अधिक प्रतिनिधित्व देने, धार्मिक उपदेशकों के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाने तथा प्रमुख तीर्थस्थलों के आसपास मांस और मदिरा की बिक्री पर रोक लगाने की मांग उठाई।

राम मंदिर के नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर हिमांगी सखी ने कहा कि मंदिरों की व्यवस्थाओं में धर्म गुरुओं और संतों की भूमिका बढ़नी चाहिए। जब बड़ी संख्या में धर्म गुरु मौजूद हैं तो धार्मिक संस्थानों के महत्वपूर्ण पदों पर संतों को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जाती।

मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि वीआईपी पास को लेकर पैसे के लेनदेन की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट में किन्नर धर्म गुरुओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की मांग की। हिमांगी सखी ने कहा कि किन्नर संतों को जिम्मेदारी मिलने से धार्मिक संस्थानों में निष्काम सेवा और पारदर्शिता को बढ़ावा मिल सकता है।

हिमांगी सखी ने 'हनुमान अंश' फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की फिल्मों से युवा पीढ़ी में धार्मिक और आध्यात्मिक रुचि बढ़ रही है। उनकी टीम ब्रज क्षेत्र के संत प्रेमानंद महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म बनाने की योजना पर विचार कर रही है। उन्होंने इसे राधा भक्ति से जुड़ी बायोपिक के रूप में बनाने की इच्छा जताई।

उन्होंने बताया कि फिल्म शुरू करने से पहले वह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनकी सहमति और मार्गदर्शन लेंगी। फिल्म की स्टारकास्ट और पात्रों के चयन में भी संत और उनके शिष्य की राय को प्राथमिकता दी जाएगी। राधा भक्ति से जुड़े किरदारों को निभाने के लिए आध्यात्मिक रूप से समर्पित कलाकारों को चुना जाना चाहिए।

कारसेवा के संभावित ऐलान को लेकर हिमांगी सखी ने कहा कि वह इसमें शामिल होंगी और धार्मिक तरीके से अपनी आवाज उठाएंगी। उन्होंने अयोध्या, काशी और मथुरा से जुड़े धार्मिक स्थलों के विवादों का जिक्र करते हुए संबंधित मामलों के लंबे समय से अदालतों में लंबित रहने पर सवाल उठाए। काशी स्थित ज्ञानवापी मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में हिंदू पक्ष को भी अपनी धार्मिक गतिविधियों को लेकर अधिकार मिलने चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके