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मराठा आरक्षण पर सियासत तेज, डिप्टी सीएम शिंदे ने जरांगे से मुंबई मार्च टालने का आग्रह किया

मराठा आरक्षण मामले पर उपमुख्यमंत्री शिंदे का सकारात्मक रुख
मराठा

मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल से राज्य की राजधानी मुंबई में प्रस्तावित मार्च पर पुनर्विचार करने का कड़ा सार्वजनिक आग्रह किया।

यह अपील मुंबई पुलिस द्वारा गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति न देने के बाद आई है।

मराठा समुदाय की मांगों के प्रति राज्य प्रशासन के 'सकारात्मक रुख' को दोहराते हुए शिंदे ने जोर दिया कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना और लाखों गणेश भक्तों को असुविधा से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुंबई के सबसे बड़े त्योहार के महत्व को रेखांकित करते हुए शिंदे ने प्रदर्शन आयोजकों से सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सीधी अपील की।

उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव एक प्रमुख त्योहार है, जो भारत और विदेश से लाखों भक्तों को मुंबई आकर्षित करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि गणेश भक्तों को कोई असुविधा न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। जिस प्रकार सरकार ने चार कदम आगे बढ़ाए हैं, उसी प्रकार मनोज जरांगे पाटिल को भी सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और मुंबई में प्रवेश करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि मराठा समुदाय ने पहले भी 58 विशाल, शांतिपूर्ण रैलियां आयोजित की हैं, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन को बाधित किए बिना अनुकरणीय अनुशासन बनाए रखने के लिए विश्व स्तर पर सम्मान प्राप्त किया।

रचनात्मक प्रतिक्रिया और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का स्वागत करते हुए शिंदे ने राजनीतिक शोषण के प्रति आगाह किया।

उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी तत्वों को आंदोलन को राजनीतिक एजेंडे में नहीं बदलना चाहिए या वंचित मराठा युवाओं की भावनाओं का शोषण नहीं करना चाहिए, और यह दोहराया कि प्रशासन सभी विचाराधीन मामलों पर संवैधानिक संवाद के लिए पूरी तरह से खुला है।

मीडिया को संबोधित करते हुए शिंदे ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) या अन्य समुदायों के अधिकारों से समझौता किए बिना मराठा समुदाय का समर्थन करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई विधायी और प्रशासनिक कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

न्यायमूर्ति शुक्रे आयोग के निष्कर्षों के बाद, नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए एक विशेष विधायी सत्र बुलाया गया था, जिसका लाभ वर्तमान में छात्र और युवा उठा रहे हैं।

चल रही कानूनी चुनौतियों और सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने पहले से रुके हुए 5,300 उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित की। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति शिंदे समिति के तहत, जिला कलेक्टर कार्यालयों में समर्पित प्रकोष्ठों ने ऐतिहासिक अभिलेखों का सत्यापन किया है और राज्य भर में लाखों कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए हैं।

उन्होंने आगे बताया कि अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से दिए जाने वाले ब्याज मुक्त ऋण की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दी गई है। विदेशी अध्ययन छात्रवृत्ति, छात्रावास आवास और सारथी संस्थान में रियायतें सहित अतिरिक्त लाभों को मौजूदा ओबीसी कल्याण योजनाओं के अनुरूप कर दिया गया है।

--आईएएनएस

एमएस/