इंफाल, 3 सितंबर (आईएएनएस)। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को राज्य विधानसभा को बताया कि 3 मई, 2023 को भड़की जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए 60,000 लोगों में से लगभग 36,000 लोगों को पहले ही फिर से बसाया जा चुका है।
कांग्रेस विधायक लोकेश्वर सिंह की ओर से शुरू की गई कम समय की चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि जातीय हिंसा से प्रभावित 24,000 विस्थापित लोग (आईडीपी) अभी भी राज्य भर के अलग-अलग राहत शिविरों में रह रहे हैं। उन्होंने विस्थापितों के पुनर्वास में हुई प्रगति का श्रेय विधायकों के सामूहिक सहयोग और प्रयासों को दिया।
खेमचंद सिंह ने कहा कि 36,000 विस्थापितों के पुनर्वास के बावजूद सरकार अभी भी कुल 60,000 विस्थापितों में से लगभग 59,000 लोगों को आर्थिक मदद दे रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो लोग घर लौट आए हैं, उन्हें भी आजीविका और कमाई के मौकों की कमी के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सरकार उन्हें हर महीने आर्थिक मदद देना जारी रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी और घाटी, दोनों इलाकों के विस्थापितों में घर लौटने की जरूरत और इच्छा एक जैसी है। राहत शिविरों और हिंसा प्रभावित इलाकों के अपने दौरों का जिक्र करते हुए खेमचंद सिंह ने कहा कि उन्होंने अलग-अलग समुदायों के लोगों से बातचीत की और पाया कि उनकी आम इच्छा शांति से रहने और अपने-अपने घरों को लौटने की थी।
विस्थापितों के मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले महीने उन्होंने विस्थापितों के छह-सात संयुक्त संगठनों के प्रतिनिधियों को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाया था, ताकि मदद देने और उनके पुनर्वास को आसान बनाने के तरीकों पर बात की जा सके।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ आर्थिक मदद से तीन साल से चल रहे संघर्ष के असर को दूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे जातीय संकट ने प्रभावित लोगों में मानसिक आघात भी पैदा किया है और इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग उन्हें हो रही मानसिक परेशानी को कम करने के लिए कदम उठा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आजीविका में मदद के लिए आगे के कदमों और पहलों पर योजना विभाग के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। खेमचंद सिंह ने मदद देने और मौके पैदा करने के एक संभावित तरीके के तौर पर श्रम विभाग के लेबर कार्ड जैसे उपायों का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि सरकार सभी तरफ से सुझावों का स्वागत करती है और इस मुद्दे को बिना किसी राजनीतिक सोच के देखा जाना चाहिए। कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के बारे में उन्होंने कहा कि इंफाल-दीमापुर (नागालैंड)-गुवाहाटी के बीच अंतर-राज्यीय बस सेवा सफलतापूर्वक शुरू होने के बाद, सरकार म्यांमार के साथ मोरेह व्यापार मार्ग को फिर से खोलने पर भी काम कर रही है।
खेमचंद सिंह ने समुदायों के बीच भरोसे की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार समुदायों के बीच भरोसा बढ़ाने और राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने, लोगों को फिर से बसाने और आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में काम कर रही है।
--आईएएनएस
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