नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम बिल को लेकर मुसलमानों के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया और सरकार पर समुदाय विशेष को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, "मुसलमानों के खिलाफ वंदे मातरम सबसे बड़ा हथियार है। यह यूसीसी से भी बड़ा हथियार है। सरकार मुसलमान को नागरिक नहीं मानती, उसको मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए और मुसलमानों का सपोर्ट नहीं चाहिए। इसीलिए सरकार की ओर से वंदे मातरम बिल पर सजा का प्रावधान कर रही है। अब जो वंदे मातरम गाएगा वही देशप्रेमी होगा और जिसको वंदे मातरम गाने से परहेज है, वो देशद्रोही होगा।"
साजिद रशीदी ने कहा कि मुसलमानों ने वर्ष 1937 में ही कांग्रेस को बोल दिया था कि हम नहीं गाएंगे; यह हमारी आस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज भी हमारी ओर से अपना रुख साफ किया जा रहा है, जिसको सरकार सुन ले कि आखिर की छह पंक्तियां मुसलमान नहीं गाएगा। मुसलमान जान दे सकता है, ईमान नहीं दे सकता। इसलिए जो भी चीज हमारी आस्था के खिलाफ होगी, चाहे बिल आए या सजा का प्रावधान किया जाए, हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
साजिद रशीदी ने कहा कि सरकार देश में नफरत फैलाना चाहती है। बेरोजगारी, शिक्षा और महंगाई ये देश में बेसिक मुद्दे हैं। इन मुद्दों पर सरकार बात नहीं करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना साफ है कि हम अपनी आस्था के खिलाफ किसी भी चीज को स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार की ओर से चाहे जो भी बिल लाया जाए।
सोमवार को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मुस्लिम समुदाय के काजी मोहम्मद अरशद ने इस प्रस्तावित विधेयक का समर्थन करते हुए इसे देश की गरिमा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया था। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा था कि "मेरी समझ के अनुसार, वंदे मातरम देशहित और राष्ट्र की एकता का प्रतीक है। यह केवल एक गीत या नारा नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में यदि सरकार इसके सम्मान की रक्षा के लिए विधेयक लाना चाहती है, तो यह एक सकारात्मक पहल है।"
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