नागपुर, 16 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो साल में 584 छात्रों की मौत की बात स्वीकार करने के बाद मामला गरमा गया है। इसे लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है।
पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और संस्थापक अभिजीत दिपके ने बुधवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की औपचारिक घोषणा की। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और संयुक्त सचिव अक्षय शिंदे भी मौजूद रहे। अभिजीत दिपके ने आवासीय स्कूलों में लगातार हो रही आदिवासी छात्रों की मौतों पर जवाबदेही की मांग की।
यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है जब आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। सरकार के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके आश्रम स्कूलों में 584 छात्रों की मौत हुई है, यानी औसतन हर दिन एक बच्चे की जान गई। पिछले महीने अगस्त में गढ़चिरौली के एक हॉस्टल में तीन आदिवासी लड़कियों की सांप के काटने से मौत हो गई थी। बताया गया कि उन्हें खाट न होने के कारण जमीन पर सोना पड़ा और एक ही कमरे में 79 लड़कियां रह रही थीं। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी नोटिस जारी किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने सरकार पर कहा, "हमारे आदिवासी और वंचित समुदायों की लगातार अनदेखी हमारे देश की अंतरात्मा पर एक गहरा दाग है। जब कोई त्रासदी होती है तो सरकार बहुत कम मुआवजे या पशु-धन देकर इंसानी जान के नुकसान को नजरअंदाज करने की कोशिश करती है। मैं आज पूछता हूं कि अगर किसी मंत्री के परिवार को ऐसा ही नुकसान उठाना पड़ता तो क्या उन्हें दो लाख रुपए का चेक या एक बकरी मंजूर होती? राज्य की नजर में एक आदिवासी बच्चे की जान की कीमत इतनी कम क्यों है?"
उन्होंने बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन बच्चों को जीने के सबसे बुनियादी अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। "वे गंदा पानी पीने और रोकी जा सकने वाली फूड पॉइजनिंग से मर रहे हैं। क्या वे भारत के नागरिक नहीं हैं? हमारा संविधान उन्हें भी वही अधिकार देता है जो सबसे सुविधा-संपन्न नागरिकों को मिलते हैं, लेकिन उन्हें कोई चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती।"
सीजेपी ने कहा कि ये मौतें एक-दो बार की चूक नहीं बल्कि एक पैटर्न हैं। संसद की एक स्थायी समिति ने पाया है कि बीस सालों में आश्रम-स्कूल योजना सिर्फ 14 राज्यों तक ही पहुंच पाई है, और समिति ने ज्यादा भीड़ और घटिया खाने को राष्ट्रीय समस्या बताया है। नई एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (ईएमआरएस) योजना के तहत मंजूर 720 स्कूलों में से सिर्फ 477 ही चल रहे हैं, और मंत्रालय ने पिछले साल अपने मंजूर ईएमआरएस बजट का सिर्फ तीन-चौथाई हिस्सा ही खर्च किया, जबकि हजारों टीचिंग पोस्ट खाली हैं।
पार्टी ने मांग की है कि तीन महीने के अंदर देश के हर आदिवासी आवासीय स्कूल का स्वतंत्र ऑडिट हो, परिणाम सार्वजनिक किए जाएं और पिछले दस साल में हुई मौतों की राज्य-वार जानकारी दी जाए। साथ ही मंजूर बनाम चालू स्कूलों का पब्लिक डैशबोर्ड बनाने की भी मांग की गई है।
--आईएएनएस
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