मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान ‘महाखनिज 2.0’ लॉन्च किया।
रेवेन्यू डिपार्टमेंट द्वारा विकसित यह अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल महाराष्ट्र में छोटे खनिजों के खनन, ट्रांसपोर्ट, परमिट और निगरानी में पूरी पारदर्शिता, दक्षता और रियल-टाइम निगरानी लाने के मकसद से बनाया गया है।
जहां 'महाखनिज' के पिछले वर्शन ने पिछले पांच सालों में राज्य के खजाने के लिए लगभग 16,000 करोड़ रुपए जुटाए, वहीं अपग्रेड किया गया 'महाखनिज 2.0' सिस्टम अगले पांच सालों में 25,000 करोड़ रुपए का रेवेन्यू इकट्ठा करने का एक बड़ा लक्ष्य रखता है।
छोटे खनिजों का पारंपरिक प्रशासन काफी हद तक मैनुअल प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई पर निर्भर था, जिससे कामकाज और निगरानी में बड़ी चुनौतियां आती थीं।
इन रुकावटों को दूर करने के लिए, रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने डिजिटल बदलाव की पहल की। पेपर ट्रांसपोर्ट परमिट पूरी तरह से खत्म कर दिए जाएँगे। क्यूआर कोड और बारकोड (डिजीटी) पर आधारित पूरी तरह से डिजिटल परमिट सिस्टम लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान और तेज बना देगा।
खनिजों को ले जाने वाले वाहनों की जीपीएस, एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन), जीआईएस और जियोफेंसिंग का इस्तेमाल करके लाइव निगरानी की जाएगी। अगर कोई वाहन अपने तय रास्ते से भटकता है, तो तुरंत ऑटोमैटिक अलर्ट मिल जाएगा। सरकारी बयान के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वीडियो एनालिटिक्स प्रशासनिक फैसलों को तेज करेंगे।
पूरे राज्य में माइनिंग परमिट, वाहनों की आवाजाही और खदान की गतिविधियों पर सेंट्रलाइज्ड निगरानी रखने के लिए कोंकण भवन से एक स्टेट-लेवल का 24×7 मॉनिटरिंग सेंटर चलाया जाएगा। कोंकण डिवीजन कमिश्नर को इस पहल के लिए 'स्टेट कोऑर्डिनेटर' नियुक्त किया गया है।
एडवांस्ड सर्वेइंग टेक्नोलॉजी—जिसमें ड्रोन, लिडार, बाथिमेट्रिक सर्वे और रिमोट सेंसिंग शामिल हैं—माइनिंग साइट्स का सटीक मैप और आकलन करेगी, जिससे अवैध खुदाई और बिना इजाजत ट्रांसपोर्ट पर रोक लगेगी। नियमों का पालन न करने पर सिस्टम उल्लंघन के प्रकार के आधार पर अपने-आप जुर्माना तय करेगा। डिजिटाइज्ड पंचनामा (साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट), नोटिस और जुर्माना वसूली से इंसानी दखल खत्म होगा और कामकाज में पूरी पारदर्शिता आएगी।
'महाखनिज 2.0' वाहन, महाभूलेख, लैंड रिकॉर्ड्स, डिजीलॉकर, बीपीएमएस, सीसीटीवी नेटवर्क और ऑटोमैटिक वे-ब्रिज जैसे प्रमुख सरकारी प्लेटफॉर्म से आसानी से जुड़ता है। जनता और कारोबारियों के सवालों को हल करने के लिए एक अलग शिकायत निवारण सिस्टम और 24×7 कॉल सेंटर (08065070555) बनाया गया है।
इसके अलावा, हर डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट में एक डेडिकेटेड डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूटिव तैनात किया जाएगा। मंत्री बावनकुले ने कहा कि फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए खास तौर पर तैयार किए गए एंड्रॉइड और आईओएस एप्लिकेशन लॉन्च किए गए हैं, जो महाराष्ट्र के बड़े 'डिजिटल इंडिया' बदलाव की दिशा में एक अहम कदम है।
--आईएएनएस
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