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महाराष्ट्र: जाति-आधारित जनगणना जरूरी: विजय वडेट्टीवार

महाराष्ट्र: जाति-आधारित जनगणना जरूरी: विजय वडेट्टीवार

भंडारा, 3 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के अधिकारों की पुरजोर वकालत की।

वडेट्टीवार ने मंडल यात्रा 2026 की शुरुआत करते हुए कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग और ओबीसी समुदाय में उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए पिछले पांच वर्षों से लगातार यह यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य समुदाय को एकजुट करना और उनके हक के लिए लड़ने की ताकत जुटाना है।

वडेट्टीवार ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा जाति-आधारित जनगणना का मुद्दा उठाए जाने के बाद, केंद्र सरकार ने जनगणना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा गिनती की प्रक्रिया में ओबीसी के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है।

आलोचना के बाद सरकार ने दावा किया कि दूसरे चरण में यह कॉलम जोड़ा जाएगा, लेकिन वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि अगर शुरुआती चरण में ओबीसी को दर्ज नहीं किया जाता है तो नागरिक ऐसे आश्वासनों पर कैसे भरोसा कर सकते हैं।

यह कहते हुए कि ओबीसी समुदाय झुकेगा नहीं, वडेट्टीवार ने घोषणा की कि वे सरकार को जाति-आधारित जनगणना के लिए एक अलग कॉलम शामिल करने के लिए मजबूर करेंगे। उन्होंने कहा कि भंडारा में लोगों की भारी भीड़ ने इस सामूहिक ताकत को दिखाया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक पदों से ऊपर है। उन्होंने कहा कि विधायक, मंत्री या सत्ता में रहने जैसे पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन ओबीसी समुदाय के अधिकार स्थायी रहते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभा को कांग्रेस नेता या विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि एक ओबीसी कार्यकर्ता के तौर पर संबोधित कर रहे हैं, जो समुदाय के अधिकारों के लिए अंत तक लड़ने के लिए समर्पित है।

महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए वडेट्टीवार ने फंड में असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जहां अन्य समुदायों के विकास निगमों को भारी फंड मिलता है, वहीं ओबीसी निगम को केवल 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।

उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद, ओबीसी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल और जिला-स्तरीय सुविधाएं नहीं हैं, और 'महाज्योति' संस्थान को भी कम फंड मिल रहा है।

उन्होंने 'महाज्योति' के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपए के आवंटन और हर जिले और तालुका में ओबीसी छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की मांग की।

वडेट्टीवार ने याद दिलाया कि ओबीसी कल्याण मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 72 हॉस्टलों को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें और समय मिलता तो सभी जिलों में हॉस्टलों का एक व्यापक नेटवर्क स्थापित हो गया होता।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दों के कारण राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव रुके हुए हैं, जिससे हजारों पद खाली पड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि यह ओबीसी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश है।

वडेट्टीवार ने अपने भाषण के आखिर में जोर दिया कि जाति-आधारित जनगणना सिर्फ आंकड़ों के बारे में नहीं है, बल्कि यह ओबीसी आबादी के अनुपात में शिक्षा, रोजगार, वित्तीय संसाधन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व हासिल करने का एक अहम जरिया है। उन्होंने समुदाय के हर सदस्य से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

सकल ओबीसी महामोर्चा द्वारा आयोजित यह यात्रा विदर्भ के 11 जिलों से गुजरेगी और 9 अगस्त को चंद्रपुर में समाप्त होगी।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी