मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार अगले चार से पांच महीनों में प्रस्तावित 'डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट' (डेल्टा एक्ट) लाने की तैयारी कर रही है।
इस कानून का उद्देश्य जमीन और अचल संपत्तियों के ब्लॉकचेन आधारित डिजिटाइजेशन और टोकनाइजेशन के लिए कानूनी एवं नियामकीय ढांचा तैयार करना है। इसके लागू होने पर महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
एक अंग्रेजी समाचार चैनल से बातचीत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि प्रस्तावित कानून से जुड़ी सिफारिशें कार्यकारी समिति को सौंपी जा चुकी हैं। राज्य सरकार फिलहाल उस ढांचे को अंतिम रूप दे रही है, जिसके तहत रियल एस्टेट संपत्तियों के मूल्य के आधार पर ब्लॉकचेन समर्थित डिजिटल टोकन जारी किए जाएंगे।
सीएम फडणवीस ने कहा, "हम 'महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट' की संरचना तैयार कर रहे हैं। इसके मसौदे के लिए केंद्र सरकार, वित्तीय संस्थानों और राज्य एजेंसियों के बीच व्यापक समन्वय की आवश्यकता है।"
उन्होंने बताया कि रियल एस्टेट अधिकारों और वित्तीय बाजारों को जोड़ने वाला मजबूत नियामकीय ढांचा तैयार करने के लिए राज्य सरकार सेबी (सेबी), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन संस्थाओं की भागीदारी संपत्ति कारोबार के नियम, नियामकीय अनुपालन और डिजिटल संपत्ति अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए जरूरी है।
डेल्टा एक्ट का मुख्य उद्देश्य ऐसे डिजिटल टोकन को कानूनी मान्यता देना है, जो किसी अचल संपत्ति में स्वामित्व या हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करें।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइजेशन से संपत्ति खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया तेज होगी, लेनदेन अधिक पारदर्शी बनेगा और अचल संपत्तियों को बैंक ऋण के लिए गिरवी रखने की प्रक्रिया भी आसान होगी। इसके अलावा संपत्ति मालिक अपनी परिसंपत्तियों के मूल्य का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकेंगे।
यह पहल भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए उभरती ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग संबंधी महाराष्ट्र सरकार की पहले की नीतियों को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
प्रस्तावित डेल्टा एक्ट राज्य के राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग द्वारा किए गए व्यापक डिजिटल सुधारों पर आधारित होगा। विभाग ने एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया है, जहां भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी विभिन्न सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं।
राजस्व विभाग के अनुसार, इस पोर्टल के जरिए 3.5 करोड़ से अधिक 7/12 (सातबारा) और 8ए दस्तावेज, 1.5 करोड़ भूमि मानचित्र, संपत्ति कार्ड और करोड़ों नामांतरण रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, क्यूआर कोड युक्त डिजिटल हस्ताक्षरित भूमि दस्तावेजों को पूर्ण कानूनी मान्यता दी गई है। इससे अब तलाठी या राजस्व अधिकारियों के भौतिक हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं रहती।
राज्य में नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भी ऑनलाइन और स्वचालित कर दी गई है। किसी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण का दस्तावेज पंजीकृत होते ही संबंधित नामांतरण प्रविष्टि स्वतः शुरू हो जाती है। इससे देरी, धोखाधड़ी और स्वामित्व विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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