भोपाल, 30 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रविवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर वर्ष 2028 में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो वह यूसीसी को समाप्त कर देगी। उन्होंने इस कानून को काला कानून बताया।
भोपाल में विधायक आरिफ मसूद द्वारा आयोजित 'जंग-ए-आजादी-उलेमा की कुर्बानी' कार्यक्रम में बोलते हुए सिंघार ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर समान नागरिक संहिता कानून को रद्द कर दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी का मुद्दा एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
यूसीसी को लेकर राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया, जब मध्य प्रदेश सरकार ने 20 जुलाई को हुई विशेष कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक 2026 को मंजूरी दी। इसके अगले दिन 21 जुलाई को यह विधेयक विधानसभा में पारित हो गया।
कांग्रेस विधायकों ने इस विधेयक को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की थी, जिसके कारण विधानसभा में हंगामा भी हुआ था।
इस कानून के प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह (एक से अधिक विवाह) पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और साथ रहने वाले जोड़ों (लिव-इन रिलेशनशिप) का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसमें विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने और परिवार से जुड़े अन्य मामलों को शामिल किया गया है।
संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है, लेकिन यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है।
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने यूसीसी को लेकर कई आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि एक समान कानून अलग-अलग समुदायों की धार्मिक और पारंपरिक प्रथाओं को प्रभावित कर सकता है। साथ ही आदिवासी समाज की परंपराओं और उन्हें मिले संवैधानिक संरक्षण पर भी इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित करेगी और विवाह, तलाक तथा संपत्ति से जुड़े मामलों में महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा देगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी यूसीसी का समर्थन करते हुए इसे समानता और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देखा है।
--आईएएनएस
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