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मध्य प्रदेश: विकसित भारत-जी राम जी योजना में हर जिले में बनेगा लोकपाल

मध्य

भोपाल, 1 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की मोहन यादव कैबिनेट ने 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिए 29 हजार 619 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया है। साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य में ग्रामीण विकास के ढांचे को गति देने के लिए 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिए 29 हजार 619 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। राज्य का अंश 60-40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रुपए होगा।

इन पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपए का व्यय होगा, जो राज्य शासन वहन करेगा। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राप्त होने वाले वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है।

साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निराकरण करेंगे। प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपए और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन मार्ग के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है, जिससे राज्य में औद्योगिक और सभी तरह के आवागमन को नई ऊर्जा मिलेगी।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य के दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपए की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई।

प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज के उपार्जन सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।

साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीकेपी