मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। मुंबई के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने पीएमएलए, 2002 के तहत 22.40 करोड़ रुपए की कुर्क संपत्ति की बहाली की अनुमति दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दिनांक 23 जुलाई 2026 के आदेश द्वारा कुर्क की गई अचल संपत्तियों को वास्तविक वैध दावेदारों को वापस करने का आदेश दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने विनोद कुमार चतुर्वेदी, मनोज पाठक और अन्य के खिलाफ अपराध से प्राप्त धन को अर्जित करने और उसे वैध बनाने में संलिप्तता के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की।
पीएमएलए जांच में पता चला कि मेसर्स अशर एग्रो लिमिटेड (विनोद कुमार चतुर्वेदी और मनोज पाठक के स्वामित्व/नियंत्रण वाली कंपनी) ने फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से व्यवस्थित रूप से ऋण राशि को निकालकर बैंकों के एक समूह के साथ लगभग 916 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
प्रमोटरों ने धन को आगे बढ़ाने और स्थानांतरित करने के लिए संबंधित समूह संस्थाओं का भी उपयोग किया। 22.40 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति को वर्ष 2021 में ईडी द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था, और उक्त कुर्की को न्याय निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पुष्टि की गई थी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए मुंबई स्थित विशेष न्यायालय पीएमएलए में अभियोजन शिकायत भी दायर की गई थी, जिसमें पीओसी के रूप में कुर्क की गई संपत्तियों की जब्ती की प्रार्थना की गई थी।
इसके बाद, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मेसर्स अशर इको पावर लिमिटेड के विरुद्ध कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू की गई। समाधान प्रक्रिया विफल होने पर परिसमापन कार्यवाही प्रारंभ की गई। इसके बाद, परिसमापक ने मुंबई स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष कुर्क की गई संपत्ति की बहाली करने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया।
पीएमएलए के अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) को वास्तविक वैध दावेदारों को वापस लौटाने/पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ईडी ने कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त करने हेतु अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष कोई आपत्ति नहीं जताई। ईडी के उपरोक्त निवेदन के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 23 जुलाई 2026 को कुर्क की गई अचल संपत्तियों को वास्तविक वैध दावेदारों को वापस लौटाने का आदेश पारित किया।