131st Constitution Amendment Bill : संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, भाजपा ने विपक्ष पर लगाया 'महिला विरोधी' का आरोप

महिला आरक्षण बिल फेल होने पर शिवराज, वैष्णव और शेखावत का विपक्ष पर तीखा हमला
संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, भाजपा ने विपक्ष पर लगाया 'महिला विरोधी' का आरोप

नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही। मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक पास नहीं हो पाया। विधेयक के गिरने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पोस्ट में लिखा, "17 अप्रैल देश की बहनों और लोकतंत्र के लिए काला दिन है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने एक बार फिर देश की बहनों को धोखा दिया, बेटियों को ठग लिया। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने विपक्ष की हर आशंका को निर्मूल साबित कर दिया था। स्‍पष्‍ट कर दिया था कि किसी राज्‍य के साथ कोई अन्‍याय और कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन महिला विरोधी विपक्ष नहीं माना।"

उन्होंने कहा कि आज केवल एक बिल ही नहीं गिरा। आज बहनों की आशाओं पर कुठाराघात हुआ। महिला विरोधी कांग्रेस और इंडी ब्‍लॉक ने बहनों के सशक्तीकरण के प्रयास को कुचल दिया। बहनों के सपनों को तोड़ दिया गया। उनके अरमानों को रौंद दिया। उनके अंदर की संभावनाओं को समाप्‍त किया और शक्ति स्वरूपा बहनों की भावनाओं को आहत किया।

उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस और इंडी ब्‍लॉक की सोच है - 'नारी तू केवल अबला है'। आजादी के अमृतकाल में, जब विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की अपार क्षमता का उपयोग होना चाहिए था, तब विपक्ष ने उसी शक्ति को मसलकर समाप्‍त करने का पाप किया है। इस बिल को गिराकर कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने अपने ताबूत में अंतिम कील ठोकी है। अब बहनें सड़कों पर निकलेंगी और कांग्रेस की भविष्‍य की संभावनाओं को कुचल कर समाप्‍त कर देंगी।"

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पोस्ट में लिखा, "कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने अपना असली रंग दिखा दिया है। कांग्रेस महिला सशक्तिकरण का विरोध करती है।"

गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा, "भारत के लिए एक काला दिन। महिला आरक्षण बिल को राहुल गांधी और उनके कांग्रेस गुट ने हरा दिया, जिससे महिला सशक्तिकरण पर उनका पाखंड सबके सामने आ गया। उन्होंने 'नारी शक्ति' को वह सम्मान और प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया जिसकी वह हकदार है और इस तरह लाखों भारतीय महिलाओं का अपमान किया।"

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर बोलने के बजाय, राहुल गांधी इधर-उधर की बेतुकी कहानियों में भटक गए, ठीक वैसे ही जैसे कोई छात्र परीक्षा की कॉपी में कुछ भी लिख देता है, क्योंकि उसके पास असल में कोई जवाब नहीं होता। जब देश को एक स्पष्ट सोच की उम्मीद थी, तो उन्होंने सिर्फ भ्रम पैदा किया। जब इतिहास को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत थी, तो उन्होंने ध्यान भटकाने की कोशिश की।

शेखावत ने आगे कहा, "पूरा भारत यह सब देख रहा है। देश की महिलाएं भी यह सब देख रही हैं। राहुल गांधी की इस बचकानी राजनीति की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और हो सकता है कि कांग्रेस महिलाओं का भरोसा फिर कभी न जीत पाए।"

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने लिखा, "महिलाओं का अपमान, इंडी गठबंधन की पहचान। कांग्रेस और उसके साथी दलों ने सालों तक नारी सशक्तिकरण को सिर्फ नारे और भाषण तक सीमित रखा। जब महिलाओं को सच में अधिकार देने का समय आया, तो वही लोग विरोध में खड़े हो गए, यही इनकी राजनीति की सच्चाई है। यह विरोध केवल एक कानून का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के हक और सम्मान के खिलाफ है। साफ है कि इनके लिए महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि अपनी कुर्सी और स्वार्थ ज्यादा जरूरी है। देश अब सब समझ चुका है। सरकार का विरोध करते-करते देश की संप्रभुता का विरोध करने वाले विपक्ष को देश की नारी शक्ति मुंहतोड़ जवाब देगी।"

केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, "कांग्रेस, सीपीएम और उनके इंडी सहयोगियों ने हमारे देश की महिलाओं के साथ एक ऐतिहासिक विश्वासघात किया है। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ वोट करके, उन्होंने हमारी बात साबित कर दी है: परिसीमन को लेकर उनका डर फैलाना, महिलाओं को विधायिकाओं में उनका 33% राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से रोकने का बस एक घटिया बहाना था। केरल और भारत की महिलाएं यह सब देख रही हैं, और वे इस बेहद असुरक्षित, महिला-विरोधी गठबंधन को कभी माफ नहीं करेंगी।"

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...