लखनऊ, 14 सितंबर (आईएएनएस)। लखनऊ विश्वविद्यालय में लंबे समय से काम कर रहे करीब 100 सुरक्षा कर्मियों को अचानक हटाए जाने का मामला सामने आया है। नौकरी जाने से नाराज सुरक्षा कर्मियों ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 के पास धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने नौकरी बहाल करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी शामिल हुए। सभी गेट नंबर-1 के पास बैठ गए और रोजगार बहाल किए जाने की मांग उठाई। सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि वे कई वर्षों से लखनऊ विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि वे वर्ष 2018 से लगातार विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं, जबकि कुलसचिव को दिए पत्र में करीब 12 वर्षों से सेवा देने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक काम करने के बावजूद अचानक नौकरी से हटा दिया गया।
गार्डों ने बताया कि नौकरी जाने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए यही नौकरी उनका मुख्य सहारा थी। अचानक रोजगार छिनने से परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
गार्डों का कहना है कि बिना कुलसचिव की अनुमति किसी कर्मचारी को हटाने का आदेश नहीं है। इसके बावजूद एजेंसी की ओर से कई गार्डों को हटाया जा चुका है। कर्मचारियों का दावा है कि करीब 60 फीसदी सुरक्षा कर्मियों को हटाने की तैयारी चल रही है।
गार्डों ने पत्र में यह भी कहा कि वर्षों की सेवा के दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई। वहीं, एजेंसी की ओर से तय मानकों को पूरा नहीं करने वाले गार्डों को हटाने की बात कही जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वे निर्धारित सभी मानकों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा कर्मियों ने विश्वविद्यालय में खाली पड़े चौकीदार और अन्य पदों पर उनकी योग्यता के अनुसार समायोजन की मांग भी की है। उन्होंने कुलसचिव से सभी गार्डों के हितों की रक्षा करने और उन्हें नौकरी से न हटाने की गुहार लगाई है।
वहीं, एनयूएसआई कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा कर्मियों की मांग का समर्थन किया। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हटाए गए सभी सुरक्षाकर्मियों को दोबारा काम पर रखने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान होने तक वे अपनी मांग को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
--आईएएनएस
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