कोलकाता, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को हाल ही में शुरू हुए जनगणना के काम में लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच में पूरी हुई।
हालांकि, जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल-जज बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई बुधवार को जस्टिस राव की एक टिप्पणी के साथ पूरी हुई, जिसमें उन्होंने शिक्षकों को एक ही समय में पढ़ाने और जनगणना का काम—दोनों काम सौंपने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया।
उनके अनुसार, शिक्षकों का मुख्य काम पढ़ाना है और उनसे या तो जनगणना का काम लिया जाना चाहिए या फिर पढ़ाने का काम।
इसी बीच, बुधवार को पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के गृह विभाग से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाने के बावजूद छात्रों के हितों की रक्षा की जाए।
हालांकि, इस बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
अलग-अलग शिक्षक संगठनों ने दावा किया है कि अगर जिन स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है, वहां के शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाया जाता है, तो उन स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का काम जरूर प्रभावित होगा।
बुधवार को राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि वह 3 अगस्त के उस नोटिफिकेशन को वापस ले रही है, जिसमें सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से स्कूल के समय के बाद जनगणना का काम करने के लिए कहा गया था।
राज्य सरकार के नए नोटिफिकेशन में कहा गया कि शिक्षक जनगणना का काम केवल 'ऑन ड्यूटी' (काम के समय) ही कर सकते हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि 'डीईआईईडी (एलिमेंट्री एजुकेशन में डिप्लोमा)' करने वाले ट्रेनीज को जनगणना के काम से छूट दी जानी चाहिए।
इससे पहले भी, कलकत्ता हाई कोर्ट ने जनगणना के काम के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती पर सवाल उठाए थे।
इससे पहले, कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार एक ही बार में बहुत सारे शिक्षकों को भर्ती करने के बजाय कुछ शिक्षकों को ही भर्ती कर सकती थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या केंद्र सरकार ने जनगणना के काम के लिए स्कूल शिक्षकों को नियुक्त करने का फैसला लेने से पहले राज्य सरकार से सलाह ली थी।
कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जनगणना अधिकारी शिक्षकों के लिए जनगणना का काम करने का तय समय बदल दें।
--आईएएनएस
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