जम्मू, 29 अगस्त (आईएएनएस)। किश्तवाड़ मामले को भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुनील भारद्वाज ने निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया और सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं का अन्य बच्चों पर भी मानसिक असर पड़ता है। वहीं, भारत को मुस्लिम राष्ट्र घोषित करने वाले मौलाना के बयान पर उन्होंने इसे बीमार मानसिकता बताया।
किश्तवाड़ मामले पर भाजपा विधायक सुनील भारद्वाज ने कहा, "यह बहुत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बच्ची के साथ यह हुआ और उसकी मृत्यु हो गई। इसका मानसिक तौर पर उस उम्र के अन्य बच्चे और बच्चियों पर भी असर पड़ता है। ऐसे मामले में सजा ऐसी मिलनी चाहिए कि मिसाल कायम हो। अगर सीबीआई जांच की जरूरत है तो वह होनी चाहिए। सजा ऐसी होनी चाहिए कि ऐसे अपराधियों के मन में डर हो और आगे से इस तरह का अपराध करने से पहले 10 बार सोचे।"
एक मौलाना के भारत को मुस्लिम राष्ट्र घोषित करने वाले बयान पर भाजपा नेता ने कहा, "ये एक बीमार मानसिकता है। कई ऐसी ताकतें हैं, जो देश के सनातन चरित्र को बदलने का प्रयास करते हैं, और इसके उदाहरण जगह-जगह मिलते हैं। उन मौलाना से मेरी यही विनती है कि अगर आप सनातन को समझ लें तो ऐसे दुष्कर्म नहीं होंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया का कोई भी ऐसा धर्म नहीं है, जो ऐसी चीजों की अनुमति देता है। उनसे अपील है कि आप जो भी बोलते हैं, उस पर एक बार विचार करें। आप भारत की सभ्यता को पढ़ें और देखें कि ऐसे दुष्कर्मों को कब इजाजत दी गई है।
कठोर सजा की मांग करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि मैंने बार-बार ये चीज कही है कि इस तरह की चीजों को किसी भी समाज में कभी भी समर्थन नहीं किया जाता है, और इन मामलों में सजा एक मिसाल के तौर पर होनी चाहिए, ताकि अगली बार ऐसा कुछ सोचने से पहले उनकी रूह तक कांप जानी चाहिए।
समय रैना और शेरोन वर्मा विवाद पर भाजपा नेता ने कहा, "भारत को एक गुलदस्ते की तरह हम देखते हैं। यहां पर अलग-अलग धर्म और जाति के लोग रहते हैं, अलग-अलग भाषाएं हैं, और क्षेत्र हैं। ऐसे में एक-दूसरे की पहचान पर टिप्पणी करने और इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। भारत की आधारभूत संरचना ही विविधता में एकता की है। ये उसको खत्म करने की कोशिश करते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि जब भी कोई भारत की एकता और अखंडता पर इस तरह की टिप्पणी करता है तो वो इसे तोड़ने की कोशिश करता है। इन्हें न सिर्फ लोगों से बल्कि भारत माता से माफी मांगनी चाहिए। भारत का जो सार है, उसे ठेस पहुंचती है और जो धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं, जो सबको एक समान नजरों से देखते हैं, उनकी भावनाएं भी आहत होती हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित करके उन्हें चेतावनी देनी चाहिए।
--आईएएनएस
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