बेंगलुरु, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक ने बुधवार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष कावेरी जल विनियमन समिति के उस निर्देश को चुनौती देने का फैसला किया, जिसमें तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने को कहा गया था।
राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि कम बारिश और जलाशयों में पानी का स्तर कम होने के कारण कर्नाटक फिलहाल तमिलनाडु को पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है।
विधान सौधा में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कावेरी बेसिन के अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठक के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने प्रेस वार्ता में कहा कि कर्नाटक के पास फिलहाल केवल 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है। ऐसे में राज्य 15 दिनों तक तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देश का पालन करने की स्थिति में नहीं है।
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा, "कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, लेकिन फिलहाल राज्य की स्थिति ऐसी नहीं है कि हम पानी छोड़ सकें। इसलिए हमने आज ही कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष इस निर्देश के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है।"
उन्होंने कहा कि कावेरी बेसिन में इस साल सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक वर्षा में करीब 66 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा, "फिलहाल हमारे जलाशयों में केवल 46 टीएमसी पानी है। वहीं, राज्य के 10 जिलों में पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए करीब 12 टीएमसी पानी चाहिए। ऐसे में कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देश का पालन करना हमारे लिए संभव नहीं है।"
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विपक्ष के नेता आर. अशोक के इस आरोप को खारिज कर दिया कि कर्नाटक कावेरी जल विनियमन समिति के सामने अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सका।
रेड्डी ने कहा, "ये आरोप पूरी तरह गलत हैं। अंतरराज्यीय जल विवादों के मुख्य तकनीकी सलाहकार श्रीरामैय्या ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के सामने हमेशा कर्नाटक का पक्ष मजबूती से रखा है और अब भी रख रहे हैं। उन्होंने सिर्फ हमारी सरकार ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान भी राज्य के कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया था। पिछले करीब 30 वर्षों से अलग-अलग सरकारें उनकी विशेषज्ञता पर भरोसा करती रही हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक ने अभी तक तमिलनाडु के लिए कोई पानी नहीं छोड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी छोड़ने से जुड़े सभी फैसलों और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
उन्होंने कहा, "हमने कहीं भी यह नहीं कहा कि हम तमिलनाडु को पानी छोड़ेंगे। हमने सिर्फ इतना कहा है कि हम इस मामले में अपील दायर कर रहे हैं। ऐसे में मुझे समझ नहीं आता कि भारतीय जनता पार्टी विरोध-प्रदर्शन क्यों कर रही है और किसानों के आंदोलन की मांग क्यों उठाई जा रही है।"
तमिलनाडु में पानी की स्थिति का जिक्र करते हुए मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दावा किया कि पड़ोसी राज्य की स्थिति कर्नाटक के मुकाबले बेहतर है।
उन्होंने कहा, "मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में करीब 41 टीएमसी पानी मौजूद है और वहां पानी का भंडारण भी बेहतर तरीके से किया गया है। राज्य में पीने के पानी का कोई संकट नहीं है। इसके अलावा, वहां बारिश से भी करीब 36 टीएमसी पानी मिला है।"
उन्होंने कहा कि तय व्यवस्था के अनुसार इस सीजन में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 39 टीएमसी पानी छोड़ना था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी जिम्मेदारियां तभी निभाई जा सकती हैं, जब राज्य में सामान्य बारिश हो और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा, "अगर बारिश ठीक-ठाक हुई होती तो हम जरूरी मात्रा में पानी सप्लाई कर पाते, लेकिन कावेरी बेसिन में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।"
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कावेरी जल विवाद पर बातचीत के लिए कर्नाटक आने की खबरों पर मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे जानकारी है कि डी.के. शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच बातचीत हुई है, लेकिन उनके प्रस्तावित दौरे या उसके उद्देश्य को लेकर मेरे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इस बारे में मुख्यमंत्री ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं।"
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक की अपील पर विचार करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण जल्द ही बैठक बुला सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य अब उस बैठक और उसके फैसले का इंतजार करेगा।
उन्होंने कहा, "कावेरी जल विनियमन समिति अपना आदेश जारी कर चुकी है। अब अगला कदम कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सामने अपील करना है। अब देखना होगा कि प्राधिकरण अपनी बैठक में क्या फैसला लेता है।"
--आईएएनएस
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