Advertisement banner

कर्नाटक के सूखा प्रभावित तालुकों की दूसरी सूची जल्द ही जारी की जाएगी : सीएम शिवकुमार

कर्नाटक

गडग (कर्नाटक), 1 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद जल्द ही सूखा प्रभावित तालुकों की दूसरी सूची की घोषणा करेगी।

सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए गदग के डिप्टी कमिश्नर ऑफिस में जिला-स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि इलाकों को सूखा-ग्रस्त घोषित करते समय सरकार को तय नियमों का पालन करना होता है।

उन्होंने कहा, "हमें गाइडलाइंस के मुताबिक सूखा-ग्रस्त इलाकों की घोषणा करनी होती है। इसी के अनुसार, हम एक स्टडी कर रहे हैं और जल्द ही दूसरी लिस्ट जारी करेंगे।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्री ने हर तालुक का दौरा किया है और जमीनी हालात के आधार पर रिपोर्ट सौंपी है, जबकि अधिकारी भी अपना आकलन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "दोनों रिपोर्टों की जांच की जानी है और केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपी जानी है।"

शिवकुमार ने कहा कि गदग में किसानों की हालत बहुत मुश्किल है और इसे जिले में पिछले पांच दशकों में देखा गया सबसे खराब सूखा बताया।

उन्होंने कहा, "किसानों की आजीविका खतरे में है और लोग परेशान हैं। इस साल बारिश सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम हुई है। मैंने हेलीकॉप्टर से यात्रा करते हुए स्थिति देखी। कई जगहों पर बुवाई बिल्कुल नहीं हुई है। जहां बुवाई हुई भी है, वहां भी किसानों को शायद 10 से 15 प्रतिशत ही फसल मिल पाए।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसानों के खेतों का दौरा किया और कपास, मूंगफली, मक्का और सूरजमुखी की फसलों का निरीक्षण किया।

उन्होंने कहा, "मैंने किसानों की मुश्किलों की गंभीरता को समझा है। मैंने उनसे बात की और उनकी चिंताएं सुनीं। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वीबी-जी राम जी योजना लोगों को रोज़गार की तलाश में पलायन करने से रोकने में मदद कर सकती है।"

शिवकुमार ने कहा कि अब तक ज़िले में केवल गजेंद्रगढ़ तालुक को ही सूखा-ग्रस्त घोषित किया गया है। हालांकि, जिला प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में सभी विधायकों ने एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें गदग ज़िले के सभी तालुकों को सूखा-ग्रस्त घोषित करने की मांग की गई है।

क्लाउड सीडिंग पर उन्होंने कहा कि विधायक एच.के. पाटिल ने इस प्रस्ताव पर अपने विचार रखे हैं। अन्य विधायकों ने भी सिंचाई, बेन्निहल्ला और विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

उन्होंने कहा, "हम राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन परियोजनाओं पर कार्रवाई करेंगे।"

मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि राज्य की सूखा आकलन रिपोर्ट केंद्रीय टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से मेल खानी चाहिए। उन्होंने कहा, "दिल्ली से आने वाली सूखा आकलन टीम को हमारी तैयार की गई रिपोर्ट स्वीकार करनी होगी। तभी केंद्र सरकार मदद देगी।"

शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने अपनी क्षमता के अनुसार पहले ही कदम उठा लिए हैं, जिसमें पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित करना भी शामिल है। उन्होंने बताया कि पीने के पानी के लिए हर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को 1 करोड़ रुपए दिए गए हैं और आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए डिप्टी कमिश्नरों के पास अतिरिक्त फंड रखा गया है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें, 5 सितंबर से 'प्रजा सेवा आंदोलन' शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन भी कर रही है और पंचायत-स्तर की कमेटियां बना रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गारंटी योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुंचें और उनका गलत इस्तेमाल न हो।

शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान सरकार के पहले 100 दिनों की उपलब्धियों और भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में बताने की योजना बनाई थी, लेकिन विपक्ष ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। उन्होंने कहा कि वह 100-दिन के कार्यक्रम के दौरान ये जानकारियां पेश करेंगे।

--आईएएनएस

एससीएच