मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने रात में बेंगलुरु की सड़कों का किया निरीक्षण; कमियां मिलने पर अधिकारियों को लगाई फटकार

बेंगलुरु सड़कों का निरीक्षण करके मंत्री ने अधिकारियों को लगाई फटकार
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बेंगलुरु, 19 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के विकास मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने बेंगलुरु में देर रात को स्थलीय निरीक्षण किया। यह निरीक्षण रात करीब 9 बजे शुरू हुआ और आधी रात के करीब तक, 3 घंटे से ज़्यादा समय तक चला। इसमें बेंगलुरु के दक्षिणी कॉरिडोर में से एक के किनारे स्ट्रीटलाइट, फुटपाथ, नालियों और सड़कों के रखरखाव में बड़ी कमियां सामने आईं।

साउथ कॉर्पोरेशन कमिश्नर के.एन. रमेश और वरिष्ठ सिविक अधिकारियों के साथ मंत्री बायर गौडा ने जेपी नगर मेट्रो स्टेशन से आउटर रिंग रोड और बैनरघट्टा मेन रोड होते हुए गोट्टिगेरे एनआईसीई रोड जंक्शन तक के हिस्से का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण मौके पर ही असलियत जानने का ज़रिया बन गया, जिसमें मंत्री ने अधिकारियों को खराब स्ट्रीटलाइट, अधूरे फुटपाथ के काम, खुली नालियों, सड़क की खराबियों, मलबे और खराब रखरखाव के लिए फटकार लगाई।

निरीक्षण में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि जेपी नगर-गोट्टिगेरे रूट पर 1,540 में से 530 स्ट्रीटलाइट- यानी लगभग 34 फीसदी काम नहीं कर रही थीं। सिर्फ 1,010 लाइटें ही चालू हालत में मिलीं, जबकि 530 पूरी तरह से बंद थीं। मंत्री ने कहा कि उनके ऑफिस के स्टाफ ने 7 और 15 सितंबर को रात में सर्वे किया था, और 11 दिनों तक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया था। जुलाई और अगस्त में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों, बार-बार दिए गए निर्देशों और यहां तक ​​कि एक इंजीनियर के सस्पेंशन के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार न होने की कड़ी आलोचना हुई।

एलईडी लाइटिंग का कॉन्ट्रैक्ट फरवरी में खत्म हो गया था, लेकिन कॉन्ट्रैक्टर तय समय के बाद भी काम पूरा नहीं कर पाया। मंत्री ने यह भी बताया कि सड़क की चौड़ाई के हिसाब से जरूरी 120-वाट की लाइटों की जगह 90-वाट की पुरानी लाइटें ही इस्तेमाल हो रही थीं। हाई-डेंसिटी लाइटें और मीडियन लाइटें भी खराब हालत में मिलीं।

हुलिमावु के पास क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के सामने और मेगा सिटी मॉल के आस-पास कई जगहों पर सड़क पर रोशनी बहुत कम थी। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग अधिकारियों से सवाल करते हुए बायर गौडा ने पूछा कि क्या इंजीनियर सच में रात में निरीक्षण कर रहे थे या सिर्फ अपने ऑफिस से रिपोर्ट बना रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो कॉन्ट्रैक्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, उन पर दोगुना जुर्माना लगाया जाए और जहां जरूरी हो, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।

मंत्री ने वेगा सिटी मॉल जंक्शन, नागार्जुन होटल और एम्पायर होटल के पास फुटपाथ की हालत पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कई जगहों पर फुटपाथ और नाली के काम के लिए बनी कंक्रीट की स्लैब इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं, जबकि खुली नालियां पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बनी हुई थीं। बिना ढकी नालियों के ठीक बगल में पड़ी स्लैब की ओर इशारा करते हुए मंत्री ने सवाल किया कि अधिकारी सुरक्षा के लिए साफ तौर पर खतरनाक इस स्थिति को ठीक करने के लिए उपलब्ध सामान का इस्तेमाल क्यों नहीं कर पाए?

उन्होंने इंजीनियरों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि फुटपाथ ठीक से बनाए जाएं और उनमें बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए आने-जाने की जगहों पर कंक्रीट के रैंप हों। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गाड़ियों को फुटपाथ पर आने से रोकने के लिए प्रेस्ड-कंक्रीट बोलार्ड लगाए जाएं और पैदल चलने वालों के लिए चिकनी और समतल सतह बनाने के लिए ब्रश किए हुए कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाए।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फुटपाथ और सार्वजनिक जगहों पर लगे बड़े अनधिकृत विज्ञापन बोर्डों को तुरंत हटा दें, जिनमें कमर्शियल प्रतिष्ठानों द्वारा लगाए गए बोर्ड भी शामिल हैं। उन्होंने सिविक अधिकारियों को बेस्कॉम के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण करने और फुटपाथ पर या उसके किनारे पड़े खतरनाक बिजली के केबल और पाइप हटाने का भी निर्देश दिया।

वेगा सिटी मॉल के सामने खुशी फर्टिलिटी सेंटर के पास उन्होंने सड़क पर गड्ढों और निर्माण कार्य के मलबे पर ध्यान दिया। अधिकारियों को 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' अभियान के तहत तुरंत मलबा हटाने का निर्देश दिया गया। हुलिमावु में मारुति पब्लिक स्कूल के पास मंत्री ने पाया कि मैकेनिकल सफाई प्रभावी नहीं रही थी और सड़क पर अभी भी कचरा पड़ा था। उन्होंने अधिकारियों को सड़क की सफाई का काम और तेज़ करने का निर्देश दिया।

बन्नेरघट्टा-एनआईसीई रोड-गोट्टिगेरे जंक्शन पर मंत्री ने सड़क चौड़ी करने, ड्रेनेज और सरफेसिंग के कामों में कमियां पाईं। उन्होंने अधिकारियों से उस हिस्से के बारे में सवाल किया, जहां सड़क पर ठीक से तारकोल की परत नहीं बिछाई गई थी और जहां नाला बनाते समय उसमें एक गैर-जरूरी मोड़ दिया गया था, जिससे सड़क की असल चौड़ाई कम हो गई थी।

इस जंक्शन को शहर का एक अहम प्रवेश द्वार बताते हुए जहां से रोजाना हजारों गाड़ियां गुजरती हैं, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सड़क के किनारे उगी झाड़ियों को हटाएं, सड़क की सरफेसिंग का काम पूरा करें और ट्रैफिक के बहाव को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन की कमियों को दूर करें।

निरीक्षण के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए मंत्री बायर गौडा ने कहा कि मेट्रो के काम और बीडब्ल्यूएसएसबी पाइपलाइन बिछाने की वजह से बन्नेरघट्टा रोड को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि डामर से अस्थायी मरम्मत का काम किया गया है, लेकिन भारी ट्रैफिक की वजह से सड़क को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय के समाधान के तौर पर, उच्च स्तर पर यह फैसला लिया गया है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के तहत पूरे बन्नेरघट्टा रोड पर 'व्हाइट-टॉपिंग' का काम किया जाएगा। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि फुटपाथों को खाली कराने के बाद उन पर दोबारा कब्जा होने से रोकने के लिए जीबीए और शहर की पुलिस की एक संयुक्त टास्क फोर्स जल्द ही बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि पैदल चलने वालों के लिए बनी सुविधाओं को ठीक करने के बाद वे जनता के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहें। बायर गौडा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्ट्रीटलाइट, गड्ढों की मरम्मत और फुटपाथ के रखरखाव को तुरंत प्राथमिकता दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जमीनी स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

--आईएएनएस

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