बेंगलुरु, 14 अगस्त (आईएएनएस)। सूत्रों ने शुक्रवार को पुष्टि की कि कर्नाटक सरकार गुटखा पर लगाए गए बैन के आदेश को कुछ ही दिनों में वापस लेने पर विचार कर रही है। सभी पार्टियों के विधायकों ने इस बैन का कड़ा विरोध किया था और राज्य के कई जिलों में सुपारी उगाने वाले किसानों पर इसके असर को लेकर चिंता जताई थी।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, विधायकों के कड़े विरोध और सुपारी उगाने वाले किसानों पर पड़ने वाले बुरे असर की बात सामने आने के बाद, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को कर्नाटक में गुटखा पर बैन लगाने वाला आदेश वापस लेने का निर्देश दिया है।
खबरों के अनुसार, गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में यह मुद्दा उठा था। बैठक में शिवकुमार ने सवाल किया कि उनकी जानकारी के बिना इतने अहम मामले में आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस फैसले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के सचिव से नाराजगी जताई और पूछा कि आदेश जारी करने से पहले उनसे इस मामले पर चर्चा क्यों नहीं की गई।
शिवकुमार ने बताया कि लगभग सात से आठ जिलों के किसान सुपारी की खेती पर काफी हद तक निर्भर हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और चिंता जताई थी कि गुटखा पर बैन से सुपारी उगाने वाले किसानों पर बुरा असर पड़ सकता है।
जब विधायक उनसे मिले, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इस फैसले के बारे में पता नहीं था और उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह इस मामले पर ध्यान देंगे। विधायकों ने बिना सलाह-मशविरे के लिए गए इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार को जन-स्वास्थ्य की चिंताओं और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
बोम्मई ने कहा कि दो बातें हैं। एक तो स्वास्थ्य है, जिसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन सुपारी उगाने वालों के हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि सुपारी की खेती अब कर्नाटक के कई जिलों में फैल गई है और बड़े पैमाने पर की जा रही है। बोम्मई ने चेतावनी दी कि सुपारी सेक्टर को प्रभावित करने वाला कोई भी एकतरफा फैसला उन किसानों पर गंभीर असर डाल सकता है जिन्होंने इस फसल में भारी निवेश किया है।
उन्होंने कहा कि किसान सुपारी की फसल के लिए पांच साल तक इंतजार करते हैं। वे इस पूरे समय निवेश करते रहते हैं। सुपारी उगाने वाले पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अगर ऐसा कोई फैसला लिया जाता है, तो सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
जेडी-एस विधायक ए. मंजू ने कहा कि सरकार को यह पता होना चाहिए कि सुपारी की खेती को प्रभावित करने वाले किसी भी कदम का कड़ा विरोध होगा, खासकर मलनाड इलाके में।
मंजू ने कहा कि मुख्यमंत्री को पता होना चाहिए कि इसका कड़ा विरोध होगा। मलनाड इलाके में बहुत से लोग सुपारी की खेती पर निर्भर हैं। सरकार को गुटखा पर प्रतिबंध लगाने का अपना फैसला वापस लेना चाहिए। अगर सरकार सुपारी पर प्रतिबंध लगाना चाहती है, तो उसकी बदनामी होगी।
उन्होंने कहा कि विधायक इस फैसले के खिलाफ किसानों के किसी भी आंदोलन का समर्थन करेंगे और मांग की कि सरकार सुपारी उत्पादकों के हितों की रक्षा करे।
गुटखा पर प्रस्तावित प्रतिबंध से उपभोक्ताओं में भी भ्रम और चिंता पैदा हो गई। घोषणा के बाद, गुटखा के आदी लोग बड़ी मात्रा में इसे खरीदते और जमा करते देखे गए; कुछ लोग तो बोरी में गुटखा ले जाते और इसे खरीदने के लिए कतारों में खड़े दिखे।
इस विवाद ने अब गुटखा और तंबाकू उत्पादों के प्रति सरकार के रुख पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। संभावना है कि सरकार एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद इस पर फैसला लेगी।
--आईएएनएस
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