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कर्नाटक: आदिवासी घोटाले पर विधानसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित, भाजपा करेगी रात भर विरोध

कर्नाटक:

बेंगलुरु, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सोमवार को कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र स्पीकर जीएस पाटिल ने अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आदिवासी कल्याण निगम घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के कारण योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए चौबीसों घंटे विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।

मॉनसून सत्र 13 अगस्त को शुरू हुआ था और इसे 27 अगस्त तक चलना था। सत्र की शुरुआत से ही भाजपा लगातार नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए कार्यवाही में बाधा डाल रही थी।

सत्र स्थगित होने के बाद, भाजपा ने घोषणा की कि वह राज्यपाल थावरचंद गहलोत से दखल की मांग करेगी और इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि हमें समझ आ गया है कि हमें न्याय नहीं मिल सकता। हम जनता के पास जाएंगे। हम इस मामले में राज्यपाल से दखल की मांग करते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि वे एक भ्रष्ट मंत्री को बचाने के लिए कांग्रेस सरकार को फटकार लगाएं।

विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का सामना करने से बचने के लिए जानबूझकर सत्र खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का सामना करने में असमर्थ कांग्रेस सरकार पिछले दरवाजे से भाग गई है। कांग्रेस सरकार भ्रष्ट है और उन लोगों को बचा रही है जिन्होंने जनता का पैसा लूटा है।

उन्होंने आगे कहा कि नागेंद्र को बचाया जा रहा है क्योंकि उन्हें हटाने से बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। विजयेन्द्र ने कहा कि मंत्री नागेंद्र ने दलितों के लिए आवंटित पैसे हड़प लिए हैं। मुख्यमंत्री को डर है कि अगर नागेंद्र को हटाया गया, तो उनका भ्रष्टाचार सबके सामने आ जाएगा। इसीलिए उन्हें बचाया जा रहा है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी सत्र को तय समय से पहले स्थगित करने के लिए सरकार और स्पीकर जीएस पाटिल की आलोचना की। अशोक ने कहा कि कर्नाटक के इतिहास में पिछले 25-30 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि विपक्ष के डर से कांग्रेस सरकार ने सत्र खत्म कर दिया है। हमने दोनों सदनों में रात भर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी और यह भी कहा था कि हम राज्यपाल के पास जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्र अचानक इसलिए खत्म कर दिया क्योंकि वह विपक्ष का सामना करने में असमर्थ थी। अशोक ने कहा कि अगर कांग्रेस में हिम्मत और क्षमता है, तो उसे सत्र को तय समय तक चलने देना चाहिए था। हमें स्पीकर पर भरोसा था क्योंकि वह एक वरिष्ठ राजनेता हैं, और हमें लगा था कि वह सदन को ठीक से चलाएंगे। लेकिन वह भी सदन नहीं चला पाए।

अशोक ने भाजपा के इस आरोप को दोहराया कि दलित समुदायों के 184 करोड़ रुपए का गबन किया गया है। उन्होंने कहा कि दलितों के लूटे गए 184 करोड़ रुपए दलित परिवारों तक पहुंचने चाहिए। इसमें कोई राजनीति नहीं है। कांग्रेस इस मामले में राजनीति कर रही है। भले ही नागेंद्र दलित हों, लेकिन राज्य में करोड़ों दलितों के साथ अन्याय हुआ है।

--आईएएनएस

एमएस/