बेंगलुरु, 15 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार राज्य में अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों की सुरक्षा और अपार्टमेंट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने मौजूदा कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह 'कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व और प्रबंधन) अधिनियम' लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सरकार विभिन्न हितधारकों से सुझाव भी ले रही है।
सरकार के अनुसार, पिछले दो दशकों में कर्नाटक में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट परियोजनाएं विकसित हुई हैं। अकेले बेंगलुरु में 25 हजार से अधिक अपार्टमेंट इमारतें हैं, जिनमें करीब 25 से 30 लाख फ्लैट हैं।
वहीं, पिछले एक वर्ष में बेंगलुरु शहरी और आसपास के क्षेत्रों में कर्नाटक रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ लगभग 60 हजार से 75 हजार फ्लैट पंजीकृत किए गए हैं। सरकार का कहना है कि शहरों में अपार्टमेंट में रहना अब लोगों की प्रमुख आवास व्यवस्था बन गया है। ऐसे में अपार्टमेंट के स्वामित्व और प्रबंधन से जुड़े कानूनों को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाना आवश्यक हो गया है।
सरकार ने बताया कि वर्तमान में लागू 'कर्नाटक अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम, 1972' और 'कर्नाटक स्वामित्व फ्लैट अधिनियम, 1972' उस समय बनाए गए थे, जब राज्य में अपार्टमेंट संस्कृति शुरुआती दौर में थी। बदलते समय के साथ इन कानूनों में कई व्यावहारिक कमियां सामने आई हैं। इनमें साझा क्षेत्रों और सुविधाओं के स्वामित्व, जमीन के अविभाजित हिस्से के हस्तांतरण, अपार्टमेंट मालिकों की एसोसिएशन के गठन और संचालन, रखरखाव, वित्तीय जवाबदेही, विवादों के समाधान तथा पुरानी और जर्जर अपार्टमेंट इमारतों के पुनर्विकास से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन कमियों के कारण कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी विवाद चलते रहे हैं और घर खरीदारों तथा बिल्डरों के बीच अनावश्यक विवाद भी पैदा हुए हैं।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित नए कानून के माध्यम से अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। साथ ही साझा क्षेत्रों और सुविधाओं का स्वामित्व अपार्टमेंट मालिकों को सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा अपार्टमेंट के पंजीकरण और प्रबंधन के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाएगी, रखरखाव निधि में पारदर्शिता लाई जाएगी, विवादों के त्वरित समाधान की व्यवस्था की जाएगी और पुरानी तथा संरचनात्मक रूप से असुरक्षित इमारतों के पुनर्विकास के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
सरकार ने बताया कि विधेयक का प्रारूप तैयार करते समय विभिन्न हितधारकों से चर्चा की गई है। अब इसे अंतिम रूप देने से पहले बुधवार सुबह 11 बजे बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू तारामंडल परिसर में हितधारकों के साथ एक और बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि उनके सुझावों को भी विधेयक में शामिल किया जा सके।