कर्नाटक की पीआरसी योजना पर भाजपा का विरोध, कानूनी आधार सार्वजनिक करने की मांग

कर्नाटक की पीआरसी योजना पर भाजपा का विरोध, कानूनी आधार सार्वजनिक करने की मांग

बेंगलुरु, 20 जुलाई (आईएएनएस)। वरिष्ठ भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को कर्नाटक सरकार के घर-घर जाकर स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) बांटने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा इस योजना की शुरुआत किए जाने के बाद जारी बयान में आर. अशोक ने कहा कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र उन 11 दस्तावेजों में शामिल है, जिन्हें चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मान्य मानता है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार को ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने का संवैधानिक अधिकार कैसे मिला। साथ ही उन्होंने मांग की कि जब तक इसका कानूनी आधार सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक इस योजना को तुरंत रोक दिया जाए।

आर. अशोक ने दावा किया, "कर्नाटक सरकार ने एक खतरनाक संवैधानिक कदम उठाया है। यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया या सुधार नहीं है। इससे संविधान, कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिनका असर सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ सकता है।"

भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से पूछा कि राज्य सरकार को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने का संवैधानिक अधिकार किस प्रावधान के तहत मिला है।

उन्होंने दावा किया, "संविधान के अनुसार नागरिकता, विदेशियों और आव्रजन से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद कर्नाटक सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए इन संवैधानिक सीमाओं को पार करने की कोशिश की है। इस फैसले के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।"

अशोक ने इस पहल के समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पूरे देश में चुनाव आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान चला रहा है।

उन्होंने पूछा, "इस फैसले का समय कई सवाल खड़े करता है। जब पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का काम चल रहा है, तब कर्नाटक सरकार ने इतनी जल्दबाजी में पूरे राज्य में पीआरसी योजना क्यों शुरू की? इससे किसे फायदा होगा? ऐसे संवेदनशील समय में इसकी जरूरत क्यों पड़ी?"

आर. अशोक ने कहा कि बिना स्पष्ट संवैधानिक अधिकार और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के ऐसी योजना लागू करने से फर्जी दस्तावेज बनने और सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार के अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर लिया गया कदम है। उन्होंने कहा कि अगर इसमें पारदर्शिता और सार्वजनिक निगरानी नहीं रखी गई तो इससे देश के संघीय ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार से इस नीति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आर. अशोक ने कहा कि अगर राज्य सरकार उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिए बिना आगे बढ़ती है तो भाजपा इस योजना का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विरोध करेगी।

उन्होंने कहा, "मैं जोरदार मांग करता हूं कि कर्नाटक सरकार तुरंत इस प्रक्रिया को रोके, पूरी पॉलिसी को सार्वजनिक करे और यह बताए कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत आगे बढ़ना चाहती है।"

उन्होंने कहा, “संविधान कोई राजनीतिक खेल का मैदान नहीं है। भारत ऐसे खतरनाक उदाहरणों का जोखिम नहीं उठा सकता।”

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी