कर्नाटक भाजपा ने सीएम शिवकुमार से टेंडर पैनल की रिपोर्ट जारी करने को कहा, पारदर्शिता की कमी पर उठाए सवाल

कर्नाटक भाजपा ने सीएम शिवकुमार से टेंडर पैनल की रिपोर्ट जारी करने को कहा, पारदर्शिता की कमी पर उठाए सवाल

बेंगलुरु, 11 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधा। उन्होंने शिवकुमार पर सरकार के कामकाज में कथित अनियमितताओं को छिपाने का आरोप लगाया और उन्हें टेंडर प्रक्रियाओं में कथित नियमों के उल्लंघनों की जांच करने वाली हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की चुनौती दी।

दरअसल, पद संभालने के बाद बेंगलुरु के वेस्ट मैनेजमेंट टेंडर में 10,000 करोड़ रुपए की रिश्वत के पहले बड़े आरोप का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को आर. अशोक पर पलटवार किया था। उन्होंने अशोक पर 'कचरा माफिया के एजेंट' के तौर पर काम करने और जलन से प्रेरित राजनीति करने का आरोप लगाया था।

शिवकुमार की आलोचना का जवाब देते हुए अशोक ने कहा कि वह 'जनता के एजेंट' के तौर पर बोल रहे हैं, न कि 'माफिया के हितों की रक्षा करने वाले कमीशन एजेंट' के तौर पर। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर कर्नाटक की 7.5 करोड़ जनता और बेंगलुरु के 1.5 करोड़ निवासियों की ओर से सरकार के कामों पर सवाल उठाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार इसलिए परेशान हैं, क्योंकि विपक्ष ने उनकी सरकार को सत्ता संभालने के बाद कोई 'हनीमून पीरियड' (शुरुआती राहत का समय) नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर ही असंतोष साफ दिख रहा है, विधायक सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें जाहिर कर रहे हैं और पार्टी हाईकमान के सामने अपनी चिंताएं रखने के लिए अक्सर नई दिल्ली जा रहे हैं।

भाजपा नेता ने पारदर्शिता और गवर्नेंस के बारे में शिवकुमार की बातों को खारिज करते हुए उन्हें 'सदी का सबसे बड़ा मजाक' बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता मुख्यमंत्री के राजनीतिक बैकग्राउंड और प्रशासनिक रिकॉर्ड के बारे में अच्छी तरह जानती है।

अशोक ने टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी और रिपोर्ट सौंपने के लिए एक हफ्ते की समय-सीमा तय की थी। उन्होंने शिवकुमार को चुनौती दी कि अगर वह पारदर्शिता के प्रति ईमानदार हैं तो तुरंत रिपोर्ट सार्वजनिक करें।

अशोक ने कहा, "अगर पारदर्शिता का जरा भी अंश बचा है तो रिपोर्ट बिना किसी देरी के सार्वजनिक की जानी चाहिए। राज्य की जनता को तथ्य देखने दें और खुद फैसला करने दें।"

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कमेटी टेंडर नियमों के उल्लंघन को छिपाने के लिए बनाई गई थी और मांग की कि इसकी जांच के नतीजों को पूरी तरह से सार्वजनिक किया जाए।

अशोक ने कांग्रेस सरकार पर कुशासन का आरोप लगाते हुए और यह कहते हुए अपनी बात खत्म की कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर सच सामने आ जाएगा।

इससे पहले, बुधवार को अशोक ने बेंगलुरु के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग की थी।

ये आरोप इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये सीएम शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार के खिलाफ भाजपा द्वारा लगाया गया भ्रष्टाचार का पहला बड़ा आरोप है।

अशोक के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद यह मामला और जोर पकड़ गया।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को बर्खास्त करने की भी मांग की।

अशोक ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट में 36,500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है और दावा किया कि 10,000 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई है।

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया, "नई (कांग्रेस) सरकार यह प्रस्ताव लेकर आई है और उसने बड़ी कंपनियों को वेस्ट मैनेजमेंट के टेंडर दिए हैं। पहले, अलग-अलग स्तरों पर वेस्ट मैनेजमेंट का काम स्थानीय ऑपरेटर करते थे। यह 36,500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से जुड़ा एक बड़ा घोटाला है। इसमें 10,000 करोड़ रुपए की रिश्वत ली गई है।"

--आईएएनएस

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