बेंगलुरु, 4 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता चलावाडी नारायणस्वामी ने मंगलवार को राज्य सरकार पर संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा और विधान परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति और उपसभापति के पद खाली नहीं होने के बावजूद कांग्रेस ने इन पदों के लिए नामों की घोषणा कर दी है।
ध्यान देने वाली बात है कि मंत्रिमंडल के मंत्रियों के साथ-साथ कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक में प्रमुख विधायी पदों पर नियुक्तियों को भी मंजूरी दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी.एस. पाटिल को कर्नाटक विधानसभा का अध्यक्ष नामित किया गया है, जबकि ए.एस. पोन्ना उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। विधान परिषद के लिए सलीम अहमद को सभापति और उमाश्री को उपसभापति के रूप में मंजूरी दी गई है।
बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने "संवैधानिक अनुचितता" की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पदाधिकारियों के इस्तीफा देने या पदों के औपचारिक रूप से खाली होने से पहले ही संवैधानिक पदों के लिए नामों की घोषणा कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया, "कांग्रेस अक्सर संविधान की प्रति हर जगह लेकर संविधान की रक्षा करने का दावा करती है। लेकिन यही पार्टी है जिसने इन पदों के लिए नामों की घोषणा कर संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन किया है।"
नारायणस्वामी ने कहा कि ऐसे संवैधानिक पदों के लिए नाम तभी तय किए जाने चाहिए जब पद खाली हो जाएं और सदन के पटल पर निर्णय लिया जाए। उन्होंने बताया कि विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ-साथ विधान परिषद के सभापति और उपसभापति अभी भी पद पर बने हुए हैं और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।
उन्होंने सवाल किया, "जब इनमें से कोई भी पद खाली नहीं है तो कांग्रेस इन पदों के लिए नामों की घोषणा कैसे कर सकती है?"
उन्होंने मांग की कि पार्टी कर्नाटक की जनता और विधानमंडल से इस संवैधानिक उल्लंघन के लिए माफी मांगे।
नारायणस्वामी ने कहा कि पदाधिकारियों के पद पर बने रहने के दौरान अध्यक्षीय पदों के लिए नामों की घोषणा करने की कोई मिसाल नहीं है।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष या सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया है और उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में ऐसा प्रस्ताव केवल एक बार पूर्व विधान परिषद सभापति शंकरमूर्ति के खिलाफ लाया गया था, जिसमें वे बच गए थे।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों एच.डी. देवेगौड़ा, रामकृष्ण हेगड़े और बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल के दौरान भी पद खाली होने से पहले इस तरह की घोषणाएं नहीं की गई थीं।
उन्होंने कहा, "एक बार चुने जाने के बाद अध्यक्ष या सभापति तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक वे इस्तीफा न दें या निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें हटाया न जाए।"
नारायणस्वामी ने कहा कि इस घोषणा से विधान परिषद के मौजूदा सभापति बसवराज होरट्टी को शर्मिंदगी हुई है।
उन्होंने कहा, "अगर होरट्टी ने इस्तीफा दे दिया होता तो किसी और का नाम घोषित करने में कोई समस्या नहीं होती। लेकिन वे अभी भी पद पर बने हुए हैं और आजादी के बाद से किसी ने ऐसी घोषणा नहीं देखी है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ने घोषणा से पहले होरट्टी से शिष्टाचार बैठक भी नहीं की और कहा कि इस कदम से विधान परिषद के सदस्यों को ठेस पहुंची है।
भाजपा नेता ने कहा कि 13 अगस्त से शुरू हो रहे विधानमंडल सत्र के दौरान यह मुद्दा उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने गलत कदम उठाया है। यह लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ विश्वासघात है और हम सदन में इसका कड़ा विरोध करेंगे।"
नारायणस्वामी ने हाल के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों की सूची में बार-बार बदलाव से सत्ताधारी पार्टी के भीतर भ्रम की स्थिति दिखती है।
उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इससे पार्टी के भीतर गंभीर आंतरिक मतभेदों का पता चलता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरीके से मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है वह इस बात से स्पष्ट है कि जिन कई नेताओं को मंत्री पद नहीं मिला है वे अब इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधान परिषद के मुख्य सचेतक एन. रविकुमार, भाजपा एमएलसी सी.टी. रवि और विधान परिषद में जेडीएस विधानमंडल दल के नेता एस.एल. भोजेगौड़ा भी मौजूद थे।
--आईएएनएस
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