केरल सरकार के समानांतर प्रशासन चला रहे राज्यपाल : विजयन

केरल सरकार के समानांतर प्रशासन चला रहे राज्यपाल : विजयन

तिरुवनंतपुरम, 18 जून (आईएएनएस)। विपक्ष के नेता और सीपीआई(एम) नेता पिनाराई विजयन ने गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्यपाल सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकें करके एक समानांतर प्रशासन चलाने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले राज्यपाल द्वारा अलग-अलग विभागों की बैठकें बुलाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयन ने कहा कि यह कदम स्थापित लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक नियमों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा, "यह बहुत गंभीर मामला है। राज्यपाल एक समानांतर प्रशासनिक अथॉरिटी बनने की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।" उन्होंने नई सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अथॉरिटी और गरिमा की रक्षा करना मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन की जिम्मेदारी है और उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

विजयन ने याद दिलाया कि 2024 में जब तत्कालीन राज्यपाल ने मुख्य सचिव और राज्य पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट मांगी थी तो पिछली सरकार ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र की पीएम-श्री एजुकेशन स्कीम को आगे बढ़ाने के यूडीएफ सरकार के फैसले पर भी निशाना साधा और कांग्रेस और आईयूएमएल पर इस मुद्दे पर पहले विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि पिछली लेफ्ट सरकार ने केरल के 'समग्र शिक्षा' फंड रोके जाने के बाद केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन बाद में इस समझौते को रोक दिया गया था।

विजयन ने तर्क दिया कि एमओयू पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि स्कीम लागू हो गई है, और उन्होंने पंजाब के उस फैसले का उदाहरण दिया, जिसमें उसने हस्ताक्षर करने के नौ महीने बाद पीएम-श्री प्रोग्राम से बाहर निकलने का फैसला किया था।

उन्होंने मांग की कि यूडीएफ सरकार बताए कि पहले विरोध करने के बाद उसने इस स्कीम को आगे बढ़ाने का फैसला क्यों किया।

उन्होंने उन दावों पर भी सवाल उठाए कि केरल को पीएम-श्री के तहत फंड मिला है, और कहा कि आवंटन 'समग्र शिक्षा' प्रोग्राम के तहत थे।

उन्होंने पब्लिक हेल्थ सिस्टम के बारे में भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि संक्रामक बीमारियों के बढ़ने के बीच दवाओं और स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि पीएससी द्वारा चुने गए लगभग 400 डॉक्टर अभी भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

--आईएएनएस

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