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केरल में बिजली संकट और गहराया, भाजपा ने पावर एग्रीमेंट को रद्द करने पर उठाए सवाल

केरल में बिजली संकट और भाजपा का तंज
केरल

तिरुवनंतपुरम, 12 सितंबर (आईएएनएस)। केरल में बिजली का संकट और गहरा गया है। पूरे राज्य में रात के समय बार-बार बिजली कटौती हो रही है और संकेत है कि यह समस्या हफ्तों तक जारी रह सकती है।

इस स्थिति ने लंबे समय के बिजली खरीद समझौतों को रद्द करने को लेकर राजनीतिक विवाद को फिर से हवा दे दी है।

भाजपा का आरोप है कि राज्य को पिछली पिनाराई विजयन सरकार के एक फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। कम कीमत वाले बिजली अनुबंधों को रद्द करने के कारण 2,130 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने आरोप लगाया कि समझौता रद्द करना तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार, पूर्व बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी और केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग की मिलीभगत का नतीजा था।

यह मुद्दा ऐसे समय में और अहम हो गया है, जब केरल भर में घरों में रात के समय बिजली कटौती हो रही है। बिजली की स्थिति तंग बनी हुई है, और जब तक अतिरिक्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक आने वाले हफ्तों में भी बिजली कटौती जारी रहने की आशंका है।

कुम्मनम ने बताया कि 2014 में यूडीएफ सरकार के दौरान झाबुआ पावर और जिंदल पावर के साथ हुए लंबे समय के समझौतों के तहत केरल को 25 वर्षों तक 4.26 रुपए से 4.29 रुपए प्रति यूनिट की दर से 465 मेगावॉट बिजली मिलनी थी।

केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग ने प्रक्रियात्मक और तकनीकी मुद्दों का हवाला देते हुए मई 2023 में इस समझौते को रद्द कर दिया था।

कुम्मनम के अनुसार, समझौते रद्द होने से केरल को अपेक्षाकृत सस्ती अनुबंधित बिजली नहीं मिल पाई और केएसईबी को बिजली एक्सचेंजों और अन्य बाहरी स्रोतों पर ज्‍यादा निर्भर होना पड़ा, जहां दरें तेजी से बढ़ सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड को कई बार 7 रुपए से 10 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि केएसईबी के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि समझौते रद्द होने से बोर्ड पर पहले ही 2,130 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ चुका है।

कुम्मनम ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्य सचिव पॉल एंटनी और केएसईबी के चेयरमैन एनएस पिल्लई की चेतावनियों के बावजूद सरकार ने समझौते रद्द करने के मामले में कोई दखल नहीं दिया।

उन्होंने सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव टीके जोस की नियुक्ति के मद्देनजर सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। नवंबर 2022 में कैबिनेट के फैसले के जरिए टीके जोस को रेगुलेटरी कमीशन का चेयरमैन बनाया गया था।

भाजपा नेता ने कहा कि समझौतों को बचाने के लिए कई विकल्प मौजूद थे, जिनमें बीडीएफओओ फ्रेमवर्क के तहत प्रावधान भी शामिल थे, लेकिन उन पर ठीक से विचार नहीं किया गया। कुम्मनम ने समझौतों को रद्द करने, रेगुलेटरी कमीशन और अधिकारियों की भूमिका, और पिछली सरकार के फैसलों की व्यापक जांच की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि अगर कोई गड़बड़ी या ड्यूटी में लापरवाही पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाए।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी