केरल: कुडुम्बश्री टीबी-मुक्त अभियान में शामिल हुई

केरल: कुडुम्बश्री टीबी-मुक्त अभियान में शामिल हुई

तिरुवनंतपुरम, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के टीबी उन्मूलन के महत्वाकांक्षी अभियान को जमीनी स्तर पर बड़ा समर्थन मिला है। राज्य के विशाल महिला सामुदायिक नेटवर्क कुडुम्बश्री ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर टीबी-मुक्त केरल के अभियान को मजबूत करने के लिए हाथ मिलाया है।

सरकार के 100 दिवसीय गहन अभियान के तहत राज्य टीबी सेल ने कुडुम्बश्री के अधिकारियों को जागरूकता संदेशों को समुदायों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस करना शुरू कर दिया है। समुदायों में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे शक्तिशाली हथियार हैं।

गांवों और शहरी इलाकों में कुडुम्बश्री की व्यापक उपस्थिति का लाभ उठाते हुए सरकार को उम्मीद है कि वह शुरुआती चरण में ही लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर सकेगी, उन्हें जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि निदान किए गए लोग बिना किसी रुकावट के अपना उपचार पूरा करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, अधिकारियों को तपेदिक के लक्षणों, इसके प्रसार के तरीकों, उपलब्ध निदान सुविधाओं, उपचार प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य लाभ में पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। तपेदिक से जुड़े कलंक को दूर करने पर भी विशेष बल दिया गया, जो अक्सर निदान और उपचार में देरी का कारण बनता है।

प्रतिभागियों को टीबी मुक्त भारत मोबाइल एप्लिकेशन से भी परिचित कराया गया, जो राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम का समर्थन करता है और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाने में सहायक है।

कार्यक्रम के अंत में कुडुम्बश्री के अधिकारियों ने जागरूकता फैलाकर और लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज न करने या चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करने के लिए प्रोत्साहित करके राज्य के टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने का संकल्प लिया।

स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना ​​है कि केरल को तपेदिक उन्मूलन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हजारों स्थानीय समूहों और अभूतपूर्व जमीनी स्तर पर उपस्थिति के साथ, कुडुम्बश्री इस अभियान के सबसे मजबूत सामुदायिक साझेदारों में से एक बनने की उम्मीद है।

केरल सरकार द्वारा 1998 में शुरू किया गया कुडुम्बश्री, दुनिया के सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता नेटवर्क में से एक है, जिसमें स्थानीय समूहों के माध्यम से संगठित 45 लाख से अधिक सदस्य हैं। गरीबी उन्मूलन के अलावा, यह आजीविका सृजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, सामाजिक विकास और सामुदायिक लामबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह टीबी-मुक्त केरल जैसे राज्यव्यापी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए एक स्वाभाविक भागीदार बन जाता है।

--आईएएनएस

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