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केरल के सीएम वीडी सतीशन ने पूर्व सरकार के फैसलों की जांच का दायरा बढ़ाया

केरल

तिरुवनंतपुरम, 4 सितंबर (आईएएनएस)। केरल में मौजूदा स्थिति देखकर ऐसा लग रहा है कि वी.डी. सतीशन सरकार पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की रणनीति अपना रही है, जिसके तहत वह कई जांचों के माध्यम से पिछली सरकार के निर्णयों और कार्यों की जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है।

मेसी प्रकरण और केरल लोक सेवा आयोग परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच से शुरू हुई कार्रवाई अब अलाप्पुझा में पुलिस ज्यादतियों तक फैल गई है। अब ब्लीचिंग पाउडर की खरीद और राज्य के स्वामित्व वाली आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनी औषधि में अनियमितताओं को लेकर विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है।

हालांकि इन नई जांचों की घोषणा एक दिन पहले की गई थी, लेकिन इनका महत्व केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं है। इससे एक व्यापक पैटर्न उभरता दिखाई दे रहा है। सतीशन सरकार लगातार जांच एजेंसियों का उपयोग उन आरोपों की पड़ताल के लिए कर रही है, जो पिनाराई विजयन सरकार के दस साल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न विभागों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े रहे हैं। इस तरह राज्य में पूर्व सरकार के कार्यकाल से संबंधित मामलों की जांच का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।

केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के जरिए ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में 7.32 करोड़ रुपए की अनियमितता की जांच का जिम्मा विजिलेंस विभाग को सौंपा गया है। इसके साथ ही राज्य के स्वामित्व वाली आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनी औषधि में खरीद से जुड़ी 2.4 करोड़ की अनियमितताओं की भी जांच की जाएगी।ये जांचें ऐसे समय में शुरू हुई हैं, जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील कई मामलों की पड़ताल जारी है। इनमें फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना राष्ट्रीय टीम के प्रस्तावित केरल दौरे से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच भी शामिल है। इस मामले की जांच एडीजीपी पी. विजयन की अगुवाई वाली विशेष जांच टीम कर रही है।

लगातार सामने आ रही इन जांचों से यह संकेत मिल रहा है कि राज्य सरकार पूर्ववर्ती प्रशासन के कार्यकाल में लिए गए विभिन्न फैसलों और विभागीय कार्यों से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की व्यापक पड़ताल कर रही है।

एक अन्य विशेष जांच दल पीएससी परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है, जबकि एक अलग टीम अलाप्पुझा में पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच कर रही है। सरकार ने अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों में आबकारी अधिकारियों द्वारा बार मालिकों से मासिक भुगतान वसूलने के आरोपों की सतर्कता जांच का भी आदेश दिया है।

यह दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से 2016 की याद दिलाता है, जब विधानसभा चुनावों से पहले वामपंथी दलों द्वारा निवर्तमान ओमन चांडी सरकार के फैसलों के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने के बाद पिनराई विजयन ने सत्ता संभाली थी। विजयन सरकार के शुरुआती कदमों में से एक चुनावों से पहले के महीनों में लिए गए कैबिनेट निर्णयों की गहन जांच करना था और उन्हें भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना था।

जांच पड़ताल से वह व्यापक राजनीतिक या प्रशासनिक जवाबदेही सामने नहीं आई, जिसका वादा अभियान ने किया था।

एक दशक बाद राजनीतिक भूमिकाएं उलटती हुई प्रतीत होती हैं। विजयन सरकार को सत्ता से बेदखल करने के बाद सतीशन अब एसआईटी और सतर्कता एजेंसियों की जांच की एक श्रृंखला के माध्यम से उस दौर के आरोपों की फिर से जांच कर रहे हैं।

जांच से अंततः अपराध साबित होता है या नहीं, यह जांच एजेंसियों और अदालतों का मामला है। हालांकि राजनीतिक रूप से संकेत स्पष्ट है: सतीशन सरकार विजयन के शासनकाल को निरंतर निगरानी में रखना चाहती है और हर नई जांच इस संदेश को और मजबूत करती है।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी