केरल का पीएम-श्री विवाद: पूर्व मंत्री सिवानकुट्टी ने पूर्व सीएम विजयन के सहयोगी को दिया जवाब

केरल का पीएम-श्री विवाद: पूर्व मंत्री सिवानकुट्टी ने पूर्व सीएम विजयन के सहयोगी को दिया जवाब

तिरुवनंतपुरम, 13 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी. सिवानकुट्टी ने सोमवार को पीएम-श्री स्कूल योजना पर पिछली एलडीएफ सरकार के रुख का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अतिरिक्त निजी सचिव रतीश कलियादान के इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करने के बाद राज्य इस योजना से एकतरफा रूप से बाहर नहीं निकल सकता।

सिवानकुट्टी ने कहा कि पीएम-श्री स्कीम को लागू करने के मामले में किसी को भी पूर्व मुख्यमंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव से सलाह लेने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कालियाडन की बातों से सिर्फ यूडीएफ-बीजेपी गठबंधन को फायदा होगा और उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह बयान मौजूदा यूडीएफ सरकार में कोई पद पाने की उम्मीद में दिया गया था।

उन्होंने कहा कि ऐसे बयान मौकापरस्त अधिकारियों की सोच को दिखाते हैं।

पूर्व मंत्री ने कहा कि पीएम-श्री स्कीम और एमओयू की कानूनी वैधता के बारे में एलडीएफ सरकार का रुख, पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन और खुद उनके (शिक्षा मंत्री के तौर पर) द्वारा विधानसभा के अंदर और बाहर कई बार समझाया जा चुका है।

सिवानकुट्टी ने कालियाडन की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि एमओयू पर हस्ताक्षर करने से केरल कानूनी तौर पर स्कीम से बाहर नहीं निकल सकता।

उन्होंने कहा कि राज्य के पास इस प्रोजेक्ट को लागू न करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन एलडीएफ सरकार ने न तो स्कीम को लागू करने की दिशा में कोई कदम उठाया और न ही इसके तहत केंद्र से कोई फंड लिया।

उनकी ये बातें कालियाडन के एक लेख के जवाब में आईं।

लेख में, पूर्व नौकरशाह ने कैबिनेट में चर्चा किए बिना केरल द्वारा एमओयू पर हस्ताक्षर करने को एक कमी बताया और तर्क दिया कि समझौते के तहत इसे खत्म करने का अधिकार 30 दिन के नोटिस पीरियड के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के पास था, जिससे राज्य का एकतरफा तौर पर इससे हटना कानूनी रूप से संभव नहीं था।

इसके बावजूद, उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा वी.डी. सतीसन सरकार एमओयू के बावजूद स्कीम को लागू न करने के एलडीएफ के राजनीतिक रुख को जारी रख सकती है।

सिवानकुट्टी ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि केरल को पीएम श्री स्कीम के तहत 92.41 करोड़ रुपए मिले हैं। उन्होंने कहा कि यह रकम 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के तहत 2023-24 और 2025-26 के बीच राज्य द्वारा पहले ही किए गए खर्च को दिखाती है और इसे स्कीम के तहत मिली मदद के तौर पर नहीं दिखाया जा सकता।

सिवानकुट्टी का यह जवाब ऐसे समय में आया है जब मौजूदा वी.डी. सतीसन कैबिनेट ने पीएम-श्री प्रोग्राम और आगे क्या किया जाना चाहिए, इस पर विचार करने के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाई है। यह कदम सतीसन सरकार द्वारा प्रचारित उस समझौते के संदर्भ में उठाया गया है जिस पर विजयन सरकार ने हस्ताक्षर किए थे।

भाजपा की ओर रुख करते हुए सिवानकुट्टी ने पार्टी के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक पुलिस जांच की मांग की। इन अनियमितताओं में हेलीकॉप्टर और वाहनों के किराए में कथित गबन और एक करोड़ पार्टी झंडे बनवाने के लिए 3.5 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट में कथित गड़बड़ी शामिल है।

उन्होंने कहा कि इन आरोपों में जनता का पैसा और पार्टी कार्यकर्ताओं का योगदान शामिल है, इसलिए इनकी गहन जांच होनी चाहिए।

--आईएएनएस

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