कामाख्या मंदिर में 22 जून से शुरू होगा अंबुबाची मेला, तीन दिन बंद रहेंगे कपाट

कामाख्या मंदिर में 22 जून से शुरू होगा अंबुबाची मेला, तीन दिन बंद रहेंगे कपाट

गुवाहाटी, 16 जून (आईएएनएस)। 'अंबुबाची मेला' पूर्वी भारत का सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। 22 जून को यह मेला शुरू होने वाला है और इसको लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

मंदिर प्रशासन ने मंगलवार को बताया कि 22 जून को रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ मेले की शुरुआत होगी। इसी के साथ मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल की शुरुआत मानी जाएगी।

अनुष्ठान शुरू होने के बाद मंदिर के कपाट तीन दिनों तक बंद रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। 26 जून की सुबह नियमित पूजा (नित्य पूजा) पूरी होने के बाद मंदिर के कपाट फिर से खोले जाएंगे, जिसके बाद श्रद्धालु दर्शन और पूजा कर सकेंगे।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों के स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

अंबुबाची मेला भारत में शक्ति उपासना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पर्व धरती माता की उर्वरता (उपजाऊ शक्ति) का प्रतीक है। मान्यता है कि मां कामाख्या इस दौरान अपने वार्षिक रजस्वला काल से गुजरती हैं।

गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों और हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।

तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष काल में मंदिर में नियमित धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते और मंदिर बंद रहता है। यह देवी के रजस्वला काल के दौरान एकांतवास का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर के कपाट दोबारा खुलने पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पवित्र अंगोदक तथा अंगवस्त्र प्राप्त करते हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ माना जाता है।

हर वर्ष अंबुबाची मेला में लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और आध्यात्मिक साधक शामिल होते हैं, जिससे गुवाहाटी धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन जाता है। मंदिर प्रशासन के साथ-साथ राज्य सरकार भी इस आयोजन को सुचारु और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी हुई है।

--आईएएनएस

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