कोलकाता, 25 जून (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के फरार कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
साथ ही अदालत ने सुमित रॉय को 29 जून तक शपथपत्र के रूप में अपने बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राज्य पुलिस को भी इसी अवधि के भीतर रॉय के खिलाफ दर्ज मामले की विस्तृत रिपोर्ट और केस डायरी पेश करने का आदेश दिया।
सुमित रॉय के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध भूमि कब्जाने से जुड़े विभिन्न आरोपों में पहले ही गिरफ्तारी वारंट और लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। इसी महीने पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी थाने की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम ने रॉय की तलाश में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर तड़के छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था।
लंबे समय तक संपर्क से बाहर रहने के बावजूद रॉय के वकील ने इसी महीने हाईकोर्ट की उक्त पीठ के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। गुरुवार को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान रॉय के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल तृणमूल कांग्रेस के महासचिव के कार्यालय में केवल एक कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे।
उन्होंने अदालत से कहा, “यदि पार्टी कार्यालय से भूमि बिक्री से जुड़े कुछ दस्तावेज बरामद हुए हैं तो उसके लिए मेरे मुवक्किल को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?”
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस जांच में फर्जी मुहरें और स्टांप बरामद हुए हैं।
सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान सुमित रॉय और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा के बीच करीबी संबंधों के प्रमाण मिले हैं। सुजॉय हाजरा को इसी अवैध भूमि कब्जा मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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