नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थित बांकरा मस्जिद में पिछले कुछ दिनों से अधिकारियों द्वारा नमाज पर रोक लगाने का मामला एक बड़े विवाद में बदल गया है, जिससे सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
अधिकारियों ने मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए एंट्री पास बंद करते समय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया, लेकिन यह मामला राजनीतिक रंग ले गया और लोगों के आने-जाने और धार्मिक अधिकारों पर सवाल उठाए गए।
बंगाल के मंत्रियों से लेकर राज्य पार्टी प्रमुख तक, कई भाजपा नेताओं ने मस्जिद में नमाज पर रोक लगाने के कदम का समर्थन किया। उनका कहना था कि एयरपोर्ट के विस्तार और सुरक्षा के लिए धार्मिक ढांचे को हटाना जरूरी था। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और नई भाजपा सरकार पर 'धार्मिक मामलों में दखल' देने का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि 136 साल पुरानी मस्जिद एयरपोर्ट के पास, मुख्य रनवे से लगभग 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। लंबे समय से इसे एयरपोर्ट के कामकाज और आपातकालीन स्थितियों से निपटने में संभावित चिंता का विषय माना जाता रहा है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि पांच दशकों तक कोई समस्या नहीं थी, लेकिन नई भाजपा सरकार 'राजनीतिक एजेंडे' को आगे बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा, "मैं इसके खिलाफ हूं। स्थानीय लोग नहीं चाहते कि मस्जिद को हटाया जाए। मैंने हमेशा कहा है कि अगर स्थानीय मुस्लिम समुदाय सहमत हो, तो मस्जिद के बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। इसे जबरदस्ती नहीं किया जाना चाहिए। यह लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। इसीलिए पिछले 50 सालों से मस्जिद को नहीं हटाया गया है। इसे हटाने का मुद्दा भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही उठा है।"
सीपीआई(एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने भी ऐसी ही बात कही और कहा कि धार्मिक स्थलों तक लोगों की पहुंच को रोके बिना सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
कई भाजपा नेताओं ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि सुरक्षा संबंधी बातों को अन्य सभी मुद्दों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और एयरपोर्ट की सुरक्षा को हर चीज से ऊपर प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा, "हमने किसी को भी अपने धर्म का पालन करने से नहीं रोका है, जैसा कि हमारे बारे में कहा गया था। बकरीद पशु वध कानूनों का पालन करते हुए मनाई गई, मुहर्रम बिना हथियार लहराए मनाया गया और कोई समस्या नहीं हुई। कानून का पालन करें और अच्छे नागरिक की तरह व्यवहार करें।"
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी सीएम अधिकारी का समर्थन करते हुए कहा, "यह मामला काफी समय से लंबित है। जब मैं कॉलेज में पढ़ता था और लेफ्ट फ्रंट की सरकार थी, तब मैंने अखबार में पढ़ा था कि एक मस्जिद की वजह से एयरपोर्ट पर लैंडिंग एरिया को नए रनवे के लिए बढ़ाया नहीं जा सकता।"
रिजु दत्ता ने भी हाई-सिक्योरिटी जोन से मस्जिद हटाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर मौजूद मस्जिद 130 साल पुरानी है। अब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का है। यह रनवे के पास स्थित है और वहां रनवे का विस्तार नहीं हो पा रहा है। यह समझना जरूरी है कि कोलकाता एयरपोर्ट एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जो बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के पास स्थित है। देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य वीआईपी इसी एयरपोर्ट से यात्रा करते हैं। इसलिए, यहां सुरक्षा से जुड़ी चिंता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फैसला किया है।"
--आईएएनएस
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