कोलकाता: आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश और सीएम सुवेंदु अधिकारी की मुलाकात, दिए उपहार

कोलकाता: आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश और सीएम सुवेंदु अधिकारी की मुलाकात, दिए उपहार

कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश के बीच मुलाकात हुई। यह मुलाकात सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से आयोजित की गई। इस दौरान सीएम सुवेंदु अधिकारी ने आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश को बंगाल की पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़े दो विशेष उपहार भेंट किए। इनमें षड्भुज-मूर्ति पटचित्र स्क्रॉल और हस्तनिर्मित शोलापिथ नौका शामिल रही।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना जरूरी है। उन्होंने इन उपहारों के माध्यम से पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री द्वारा भेंट किए गए विशेष षड्भुज-मूर्ति पटचित्र में श्री चैतन्य महाप्रभु के छह भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप को दर्शाया गया है। इस चित्र में भगवान राम, भगवान कृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के स्वरूपों का समावेश किया गया है। ऊपरी भुजाओं में धनुष-बाण भगवान राम का प्रतीक हैं। मध्य भुजाओं में बांसुरी भगवान कृष्ण का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि निचली भुजाओं में संन्यास-दंड और कमंडल श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रेम और भक्ति के संदेश को दर्शाते हैं।

इस कलाकृति का निर्माण पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला स्थित नाया गांव की प्रसिद्ध लोक कलाकार स्वर्ण लता चित्रकार ने किया है। स्वर्णा लता चित्रकार पारंपरिक पटुआ परिवार से आती हैं और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सदियों पुरानी पटचित्र कला को जीवित रखने का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी और स्वीडन सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। उनकी उपलब्धियों ने ग्रामीण महिला कलाकारों के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नारा लोकेश को शोलापिथ से निर्मित एक विशेष नौका भी भेंट की। शोलापिथ पश्चिम बंगाल की पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल हस्तशिल्प कला है, जिसे जल क्षेत्रों में पाए जाने वाले विशेष पौधे से तैयार किया जाता है।

यह पूरी तरह हस्तनिर्मित कला है और इसमें किसी मशीन का उपयोग नहीं किया जाता। शोलापिथ शिल्प को जीआई टैग भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता और प्रामाणिकता को संरक्षण प्रदान करता है।

बताया गया कि यह शोलापिथ नौका पश्चिम बंगाल के तमलुक और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने समुद्री और व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं और ऐसे प्रयास इन रिश्तों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम में बंगाल की लोक कला, पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी