बेंगलुरु, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष और एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यह घटनाक्रम शिक्षा क्षेत्र में अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन की जीत है।
बेंगलुरु में केपीसीसी मुख्यालय, इंदिरा गांधी भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पत्र मजाक का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया था।
पूर्व शिक्षा मंत्रियों से तुलना करते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं ने भारत के शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, "अबुल कलाम आजाद ने नौ साल तक शिक्षा मंत्री के तौर पर काम किया और विश्व-भारती, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज धर्मेंद्र प्रधान जैसे लोग इस पद पर बैठे हैं।"
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सुधार के बार-बार किए गए वादों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता देने में विफल रही है।
उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव रखने का श्रेय जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल से लेकर अब तक की सरकारों को दिया और साक्षरता दर में हुई बढ़ोतरी का जिक्र किया, जो आजादी के समय 11 प्रतिशत थी और अब 76 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है।
उन्होंने कहा, "आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थानों की स्थापना ने भारत के भविष्य को आकार देने में मदद की। वीकेआरवी राव, एसआर बोम्मई और अर्जुन सिंह जैसे पूर्व शिक्षा मंत्री अपनी विद्वता और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में पहले कभी भ्रष्टाचार के इतने बड़े आरोप नहीं लगे जितने अब लग रहे हैं, और दावा किया कि मौजूदा सरकार के दौर में विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा और स्तर में गिरावट आई है।
प्रधान के इस्तीफे को 'अपने आप में कोई बड़ी बात नहीं' बताते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि यह परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर देश भर में छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों का नतीजा है। छात्रों ने सामूहिक कार्रवाई की ताकत दिखाई है। यह छात्र आंदोलन की जीत है, किसी राजनीतिक दल की नहीं।
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि 152 बार परीक्षा के पेपर लीक हुए और दावा किया कि ऐसी अनियमितताओं के खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिसमें लाठीचार्ज और आपराधिक मामले दर्ज होना शामिल है।
उन्होंने आत्महत्या करने वाले 22 छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे, छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने और नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत दिल्ली पुलिस को दिए गए अतिरिक्त अधिकारों को रद्द करने की मांग की।
उन्होंने कहा, "सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा काफी नहीं है। राहुल गांधी और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा उठाई गई मांगों को भी पूरा किया जाना चाहिए। कांग्रेस तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।"
हरिप्रसाद ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन आरोपों को खारिज कर दिया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 400 से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए थे। इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि एक शांतिपूर्ण आंदोलन को पटरी से उतारने की कोशिशें की गईं।
--आईएएनएस
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