रांची/पटना, 21 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके बाद राज्य में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, वहीं छात्र संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
इस मामले पर बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने शुक्रवार को आईएएनएस से कहा, "छात्र आंदोलन के डर से झारखंड सरकार को छात्रों के पक्ष में फैसला लेना पड़ा और हाई कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया। ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट को लगा कि यह फैसला छात्रों के हित में नहीं था, इसलिए उसने इसे रद्द कर दिया।"
वहीं, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने इसे कानूनी मामला बताया। उन्होंने कहा, "यह एक कानूनी मामला है। हम कानूनी मामले पर क्या टिप्पणी कर सकते हैं? इसमें दम है या नहीं, हाईकोर्ट खुद ही कानूनी पहलुओं पर विचार करेगा।"
उधर, जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य नेताओं के पुतले जलाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह लोकतंत्र है। उन्हें विरोध और आंदोलन करने की आजादी है लेकिन उन्हें समझदारी से काम लेना चाहिए। सरकार ने जो बेहतर था, वो किया। भाजपा शासित राज्यों में भी पेपर लीक हुए लेकिन झारखंड सरकार ने जो फैसला लिया वैसा किसी भी राज्य में नहीं किया गया। अब हाईकोर्ट ने उस पर स्टे लगा दिया है तो कोर्ट के किसी भी आदेश पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।"
बता दें कि झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद एक वर्ग के छात्रों ने इसका स्वागत किया था, तो नियुक्त हो चुके अभ्यर्थी इसके विरोध में थे। अब हाईकोर्ट के स्टे के बाद यह मामला और उलझ गया है।
इस बीच गुरुवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद छात्र नेता प्रकाश ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का बचाव तक नहीं किया। यह छात्रों के साथ पूरी तरह से धोखा है
--आईएएनएस
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