Neeraj Kumar JDU Statement : देश के मानव जीवन सूचकांक को बेहतर करने के लिए जीडीपी ग्रोथ जरूरी : जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार

आर्थिक डीएनए बयान पर जदयू का समर्थन, जी-राम जी योजना विवाद पर विपक्ष पर हमला
देश के मानव जीवन सूचकांक को बेहतर करने के लिए जीडीपी ग्रोथ जरूरी : जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत के आर्थिक डीएनए में बदलाव की बात कही थी।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "नवउदारवाद की नीतियों के बाद देश वैश्विक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे जनसंख्या घनत्व के देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना एक चुनौती है। इस समय भारत पीएम मोदी के नेतृत्व के कारण पूरी दुनिया में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के दौड़ में शामिल है। अगर हमें देश के मानव जीवन सूचकांक को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मानक के अनुरूप बेहतर स्थिति में लाना है, तो यह उस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नीरज कुमार ने विकसित भारत जी-राम जी बिल के नाम को लेकर हो रहे विवाद पर कहा, "हंगामा करना विपक्ष का राजनीतिक दायित्व है, लेकिन महत्वपूर्ण विषय यह है कि उनके नेतृत्वकर्ता (राहुल गांंधी) ही लापता हैं। वे विदेश सैर-सपाटे पर निकले हुए हैं। मनरेगा का नाम बदलकर जी-राम जी योजना किया गया, लेकिन उसके एक महत्वपूर्ण पक्ष को विपक्ष स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि पहले न्यूनतम 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।"

उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी की भूमिका को कौन नकार सकता है? गांधीजी जी से बड़ा रामभक्त कौन पैदा हुआ है? जब उनके शरीर पर गोलियों की बौछार हो रही थी, तो उनके मुंह से 'हे राम' निकला। अगर विपक्ष महात्मा गांधी के व्यक्तित्व पर राजनीतिक एजेंडा तय करने का काम कर रहा है, तो गांधी से बड़ा रामभक्त न कोई हुआ है और न ही कोई होगा।"

जदयू प्रवक्ता ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कथित तौर पर भगवान राम पर की गई टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "यह गंभीर आपत्तिजनक है। उन्हें स्वामी विवेकानंद के जीवन संग्रह को पढ़ना चाहिए, जिनका बंगाल से सरोकार रहा है। विवेकानंद ने साफ तौर पर कहा है कि देश के अंदर धर्मांतरण तलवार की धार पर नहीं, सामाजिक-आर्थिक कारणों से हुआ है। ऐसे में जो स्वामी विवेकानंद को नहीं, बल्कि ममता बनर्जी को अपना रहा है, यह उसका दुर्भाग्य है।"

--आईएएनएस

 

 

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