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जिस इस्लाम में लिखा है कि मूर्ति पूजा नहीं कर सकते, गरबा में आकर वे क्या करेंगे: आनंद दुबे

गरबा और मछली खाने के मुद्दे पर राजनीति, इस्लाम और सनातन धर्म की भावनाएं
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मुंबई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर में पूजा करने के बाद सीएम सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने, गरबा विवाद और सपा नेता अबू आसिम आजमी की टिप्पणियों और ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक पर प्रतिक्रिया दी है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए आनंद दुबे ने कहा, "चाहे अबू आजमी हों या एआईएमआईएम के वारिस पठान हों और चाहे मंत्री नितेश राणे हों, सभी की एक जैसी भाषा है। सब नफरत की बात करते हैं। गरबा सनातनियों का एक पवित्र त्योहार है और माताएं-बहनें मां की प्रतिमा के सामने नृत्य करती हैं। ऐसे में हमको ये समझ नहीं आ रहा है कि जिस इस्लाम में लिखा है कि मूर्ति पूजा नहीं कर सकते, तो वहां आकर वे क्या करेंगे। अबू आजमी की ओर से कहा जा रहा है कि उनको नहीं जाना चाहिए तो यह सही बात है।"

बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने को लेकर आनंद दुबे ने कहा, "धीरेंद्र शास्त्री हिंदू और सनातन के कथावाचक हैं। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में सात्विक होकर जाना अच्छा है और सुवेंदु अधिकारी मंदिर में बैठकर मछली खा रहे हैं। दोनों लोग अपना-अपना तर्क दे रहे हैं। अगर किसी की संस्कृति है कि वह मंदिर में खा रहा है तो उसको क्या कहा जा सकता है और कोई कह रहा है कि सात्विक रहो तो उसको भी क्या कहा जा सकता है। हमारा मानना है कि इसको विवादित नहीं बनाना चाहिए। सनातन धर्म में सब चलता है।"

आनंद दुबे ने आगे कहा, "सनातन धर्म में सबकी अपनी-अपनी भावना है। किसी को पत्थर में भगवान दिखते हैं और किसी को भगवान में भी पत्थर दिखता है। यही हिंदुओं की खूबसूरती है। हिंदू इतना विशाल है कि जो भगवान को नहीं मानता है वो भी हिंदू है। हमारा यही कहना है कि जीवों का सम्मान होना चाहिए। पर्यावरण को भी हम लोग भगवान की तरह पूजते हैं। पहले साधु-संत वृक्षों से भी बात करते थे। अब वह धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। बहुत से देशों में जिन पशु-पक्षियों का हम आदर करते हैं, भगवान की तरह पूजते हैं उसे भी लोग खा जाते हैं।"

उन्होंने कहा, "जिसको खाना है, वो खाए। यह उसका व्यक्तिगत विषय है, लेकिन जो नहीं खा रहा है उसके सामने तो नहीं खाना चाहिए। जो सात्विक है, उसको सात्विक रहने देना चाहिए, और जो तामसी है, उसको तामसी रहने दो। एक ही देश में सब रहते हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर आनंद दुबे ने कहा, "ब्रिक्स कई देशों का समूह है, जिसमें भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देश हैं। पुतिन के रिश्ते भारत से बहुत अच्छे हैं। मेरा मानना है कि एक सकारात्मक चर्चा हो रही है। हमारे देश को रूस से क्या-क्या फायदा होगा। इन सब चीजों पर हमें जरूर ध्यान देना चाहिए।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी