मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। मराठा आरक्षण के पैरोकार मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई में प्रस्तावित भूख हड़ताल को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के शीर्ष राज्य नेताओं ने आगामी गणेशोत्सव से पहले संयम बरतने का आग्रह किया है।
मंगलवार को जब जरांगे पाटिल अंतर्वाली सारथी से मुंबई के आजाद मैदान की ओर रवाना हुए तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने त्योहारों के चरम मौसम के दौरान सार्वजनिक कानून व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सरकार के रुख को दोहराया।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार उनकी 14 मुख्य मांगों में से 12 को मान चुकी है, जबकि शेष मांगें विचाराधीन हैं। उन्हें इस बारे में जानकारी दी गई है। त्योहारों के दौरान, हम ऐसे निर्णयों की अपेक्षा करते हैं जिनसे जनता को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी पुलिस की है और पुष्टि की कि मुंबई में आंदोलन करने के लिए जरांगे पाटिल का प्रारंभिक आवेदन खारिज कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया है। यदि नया आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो वे उस पर विचार करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि गणेशोत्सव मुंबई और पुणे में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, और हमारी आशा है कि इस उत्सव में कोई बाधा न आए। विरोध प्रदर्शन आम बात है, और जरांगे पाटिल पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आरक्षण मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की सलाह देते हुए उत्सव के दौरान होने वाली बाधाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने आगे कहा कि ऐतिहासिक रूप से, 58 मराठा रैलियां शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गईं और जनता को कोई परेशानी नहीं हुई। अब सभी को इसी तरह का संयम बरतना चाहिए।
शिंदे ने कहा कि लोकतांत्रिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन यह सामुदायिक कल्याण पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने मराठा आरक्षण के प्रति हठधर्मी होने के बजाय हमेशा सकारात्मक और खुले विचारों वाला दृष्टिकोण अपनाया है। हम दूसरे पक्ष से भी बिना किसी राजनीतिक मकसद के इसी तरह के रचनात्मक दृष्टिकोण की उम्मीद करते हैं।
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