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जम्‍मू-कश्‍मीर: हाइब्रिड फूलों की खेती से कटरा के किसानों की बढ़ी आय, सरकार की पहल का दिखा असर

जम्‍मू-कश्‍मीर:

कटरा, 23 अगस्‍त (आईएएनएस)। जम्‍मू-कश्‍मीर में कृषि विभाग किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस पहल के तहत फूल उगाने वालों से बातचीत करने और उनकी प्रगति का जायजा लेने के लिए समाचार एजेंसी आईएएनएस ने डडुरा और भगथा गांवों का दौरा किया।

भगथा गांव में, 80 वर्षीय किसान प्रेमू सक्रिय रूप से हाइब्रिड फूलों की खेती कर रहे हैं और अपनी उपज से अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस उम्र में खेती के प्रति उनका उत्साह दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। फूलों की खेती ने न केवल उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

प्रेमू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों को कई सुविधाएं और सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि समय पर मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री और सरकारी योजनाएं किसानों को खेती को अधिक लाभदायक आजीविका में बदलने में मदद कर रही हैं।

किसान प्रेमू ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि फूलों का काम करने से आज हमें पहले से ज्‍यादा फायदा हो रहा है। सरकार ने भी मदद की है। हमें बहुत फायदा हुआ है। हमारे काम से हमें काफी लाभ मिला है। उन्होंने हमें पेंशन भी दी है—हर तीन महीने में मिलने वाले 2,000 रुपए भी मिलते हैं, इसलिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद। ऐसे कामों को बढ़ावा देने के लिए मैं सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं। उन्हें भविष्य में भी ऐसे काम करते रहना चाहिए।

वहीं, डडुरा गांव के राशिद लगभग 3 कनाल जमीन पर फूलों की खेती कर रहे हैं। फूलों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विभाग के अनुरोध पर आईआईआईएम जम्मू के माध्यम से उन्हें पौधे लगाने के लिए सामग्री (प्लांटिंग मटीरियल) उपलब्ध कराई गई थी। यह सहायता किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण पौधे लगाने की सामग्री प्राप्त करने में मदद कर रही है।

उन्‍होंने आईएएनएस को बताया कि हाईब्रिड और गुणवत्‍ता वाले पौधे लगाने से हमारी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। हमने सब्‍जी की खेती के साथ ही डेयरी फर्म भी खोला है। सभी लोगों को बढ़-चढ़ कर हिस्‍सा लेना चाहिए। इससे घर बैठे आमदनी हो सकती है।

भगथा गांव में किसान गुलसार भी फूलों की खेती में सफलतापूर्वक लगे हुए हैं और इस व्यवसाय से अच्छी कमाई कर रहे हैं। किसानों ने समय पर मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

ये पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फूलों की खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आय और स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

80 साल की उम्र में फूलों की खेती में किसान प्रेमू की सफलता यह साबित कर रही है कि उम्र नवाचार, आय और आत्मनिर्भरता में कोई बाधा नहीं है।

पंथल ब्लॉक के एआईए राकेश कुमार शर्मा ने बताया, “ये बहुत मेहनती किसान थे। हमने आईएफएस (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) के तहत सोचा कि अगर ये किसान फूलों की खेती के साथ-साथ पोल्ट्री और डेयरी का काम भी करें, तो अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसी के तहत, मैंने आईआईआईएम के साथ तालमेल बिठाकर गुजारिश की थी। उन्होंने मेरे किसानों को मुफ्त और हाइब्रिड बीज उपलब्ध कराए, चाहे वे भगथा, पंथल ब्लॉक या दादुरा के किसान हों। इसमें हमने लगभग 600 कनाल जमीन को कवर किया है।

उन्‍होंने कहा कि हमारी सोच यह है कि अगर हमारे युवा खाली बैठे हैं, तो ये किसान एक मिसाल हैं कि वे भी दो-तीन कनाल जमीन से एक लाख रुपए कमा सकते हैं। कई सरकारी योजनाएं चल रही हैं - चाहे वह एचएडीपी योजना हो, जेकेसीआईपी योजना हो या मिशन युवा, कई योजनाएं हैं। युवाओं के लिए मकसद एक मिसाल कायम करना और सीखना है। अगर मैं स्किल (हुनर) और विल (इच्छाशक्ति) की बात करूं, तो आज ये दोनों चीजें मौजूद हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी