लखनऊ, 29 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की हकीकत अब सीधे गांवों में जाकर परखी जाएगी। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 15 से 25 जुलाई के बीच एक दर्जन से अधिक जिलों का दौरा कर नल से जलापूर्ति, पानी की गुणवत्ता और परियोजनाओं की प्रगति का मौके पर निरीक्षण करने का फैसला किया है।
उन्होंने साफ कहा कि जलापूर्ति या नदियों की सफाई में लापरवाही मिली तो संबंधित चीफ इंजीनियर और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन मुख्यालय में सोमवार को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं का लाभ हर गांव तक निर्धारित मानकों के अनुरूप पहुंचे।
उन्होंने कहा कि अब योजनाओं की समीक्षा केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी वास्तविक स्थिति गांवों में जाकर देखी जाएगी। मंत्री ने बताया कि 15 से 25 जुलाई के बीच वह स्वयं नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था, पेयजल की गुणवत्ता, परियोजनाओं की प्रगति और ग्रामीणों से सीधे फीडबैक लिया जाएगा।
दौरे के दौरान मंत्री और अधिकारी संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम भी करेंगे तथा ग्रामीणों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार, 15-16 जुलाई को ललितपुर, झांसी तथा जालौन के गांवों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद 18-19 जुलाई को सुल्तानपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र में जलापूर्ति योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि 24 जुलाई को मथुरा में यमुना नदी की स्वच्छता को लेकर संत संवाद आयोजित होगा। इसमें संतों, स्थानीय ग्रामीणों और संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ यमुना संरक्षण और नदी सफाई अभियान को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद यमुना किनारे बसे गांवों में जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
समीक्षा बैठक में स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी जिले में जलापूर्ति बाधित होने या नदियों की सफाई में लापरवाही की शिकायत मिली तो संबंधित चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी चीफ इंजीनियरों को अपने-अपने क्षेत्रों की प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा करने और समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी चीफ इंजीनियर अपने स्तर पर गांवों में 'जल अर्पण' कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि ग्रामीणों को जलापूर्ति व्यवस्था सौंपने के साथ-साथ जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन के प्रति भी जागरूक किया जा सके।
--आईएएनएस
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