जेकेएसए ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन, लाठीचार्ज को बताया निंदनीय

जेकेएसए ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन, लाठीचार्ज को बताया निंदनीय

श्रीनगर, 21 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने मंगलवार को नई दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया और नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा की।

जेकेएसए के नेशनल कन्वीनर, नासिर खुएहामी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि एसोसिएशन नई दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व वाले प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स और युवाओं को अपना पूरा सपोर्ट देता है और दिल्ली पुलिस द्वारा शांति से इकट्ठा होने और अपनी बात कहने के अपने डेमोक्रेटिक और कॉन्स्टिट्यूशनल अधिकार का इस्तेमाल करने वाले प्रदर्शनकारियों पर बहुत ज्यादा और गलत तरीके से बल इस्तेमाल करने की कड़ी निंदा करता है।

खुएहामी ने कहा कि प्रोटेस्ट की जगह से जो बहुत परेशान करने वाले विज़ुअल्स सामने आ रहे हैं, जिसमें बिना हथियार वाले स्टूडेंट्स और युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस छोड़े जाना, घसीटा जाना, हमला किया जाना, और हिरासत में लिया जाना दिख रहा है, उसने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।

उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक मार्च निकालने की कोशिश करते समय महिलाओं, स्टूडेंट्स और शांति से हिस्सा लेने वालों पर फिजिकल फोर्स का इस्तेमाल किया गया। ऐसे सीन की एक कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेसी में कोई जगह नहीं है, जो कानून के राज, कॉन्स्टिट्यूशनल मोरैलिटी और अपने नागरिकों की सहमति से अपनी लेजिटिमेसी हासिल करती है।

उन्होंने कहा कि शांति से इकट्ठा होने, बोलने की आजादी और असहमति जताने का अधिकार भारत के कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 19 के तहत गारंटीड है। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है, और इसका जवाब जबरदस्ती, धमकी और हिंसा से देना उन संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करता है जिन्हें बनाए रखना सरकारी संस्थाओं का फर्ज है।

एसोसिएशन ने कहा कि नीट-2026 पेपर लीक परीक्षा घोटालों की एक परेशान करने वाली सीरीज में सबसे नया है, जिसने देश के परीक्षा और भर्ती सिस्टम की साख को बहुत कमजोर कर दिया है।

पिछले कई सालों में, पेपर लीक, गड़बड़ियों और एडमिनिस्ट्रेटिव नाकामियों की बार-बार हुई घटनाओं ने उन लाखों छात्रों की उम्मीदों को तोड़ दिया है, जिन्होंने कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं में सालों की कड़ी मेहनत, त्याग और उम्मीद लगाई है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रांसपेरेंसी, अकाउंटेबिलिटी और सही सुधारों के जरिए जनता का भरोसा वापस लाने के बजाय, न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया गया है।

संबंधित पुलिस डिप्टी कमिश्नर को यह बताना चाहिए कि किसके कहने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल का इतना ज्यादा इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई थी।

एसोसिएशन ने कहा, “हमारे युवाओं की उम्मीदों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है, जबकि उनके भविष्य को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार लोग लगातार बचाव का मजा ले रहे हैं। यह बहुत परेशान करने वाला है और किसी भी डेमोक्रेसी में मंजूर नहीं है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि जो सरकार सच में डेमोक्रेटिक मूल्यों में विश्वास करती है, उसे विरोध का जवाब बातचीत से देना चाहिए, डराने-धमकाने से नहीं। सरकार को स्टूडेंट्स को भरोसे में लेना चाहिए था और स्थिति को टकराव तक बढ़ने देने के बजाय उनकी असली चिंताओं पर कंस्ट्रक्टिव तरीके से बात करनी चाहिए थी। हिंसा कभी भी शांतिपूर्ण डेमोक्रेटिक एक्सप्रेशन का जवाब नहीं हो सकती।

एसोसिएशन ने कहा कि किसी आंदोलन या उसकी मांगों से असहमति कभी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ज्यादा बल प्रयोग को सही नहीं ठहरा सकती। डेमोक्रेसी बातचीत, बहस और पब्लिक पार्टिसिपेशन से फलती-फूलती है; लाठीचार्ज, आंसू गैस, डराने-धमकाने या विरोध को दबाने से नहीं। स्टूडेंट्स देश के दुश्मन नहीं हैं; वे देश के भविष्य की आवाज हैं। उनकी चिंताओं को हमदर्दी और गंभीरता से सुना जाना चाहिए, न कि जबरदस्ती के तरीकों से चुप कराया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एससीएच