अमरावती, 12 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमिटी (डीएससी) शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर निशाना साधा है। भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए 'डीएससी घोटाला' के लिए सरकार को नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
शुक्रवार और शनिवार को एक्स पर की गई दो पोस्ट में जगन ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर नायडू सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए और स्पोर्ट्स से जुड़े सर्टिफिकेट का दावा करने वाले उम्मीदवारों के वेरिफिकेशन पर शक जताया।
शनिवार को अपनी पोस्ट में जगन ने सीधे नायडू को टैग किया और टीचर बनने के इच्छुक उम्मीदवारों से जुड़े मामलों में अपनाई गई वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
जगन ने पूछा, "मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, क्या टीचर बनने के इच्छुक लोगों का करियर आपके लिए मजाक बन गया है?" इसके बाद उन्होंने तीन ऐसे मामलों का जिक्र किया जिनसे उम्मीदवारों के दावों की सच्चाई पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने एक ऐसे मामले का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर विजेताओं की लिस्ट से उम्मीदवारों के नाम गायब थे। एक और मामले में उन्होंने दावा किया कि खो-खो अधिकारियों से वेरिफिकेशन करने पर पता चला कि एक स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट नकली था।
आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से पुष्टि करने के बाद जगन ने यह भी आरोप लगाया कि एक उम्मीदवार द्वारा बताए गए स्पोर्ट्स इवेंट का आयोजन कभी हुआ ही नहीं था।
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने इन मामलों को स्क्रूटनी प्रोसेस में कमियों के सबूत के तौर पर पेश किया और सवाल उठाया कि क्या इस भर्ती प्रक्रिया को अब भी निष्पक्ष और पारदर्शी कहा जा सकता है।
उन्होंने पूछा, "क्या इसे किसी भी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी कहा जा सकता है? क्या इसी वजह से डीएससी घोटाला नहीं हुआ? क्या आप इसकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेंगे?"
शुक्रवार को एक्स पोस्ट में जगन ने टीचर भर्ती से जुड़े सरकारी आदेशों और पॉलिसी में हुए बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया। जगन ने पूछा, "अगर आपका मकसद निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती करना था, तो क्वालिफाइंग परीक्षा की जरूरत को खत्म करने वाले सरकारी आदेश क्यों जारी किए गए?"
उन्होंने डीएससी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद किए गए नीतिगत बदलावों पर भी सवाल उठाए।
जगन के मुताबिक, सरकार ने बाद में नियमों में इस तरह बदलाव किया कि पुरानी परीक्षा-आधारित भर्ती व्यवस्था फिर से लागू हो गई। जगन का तर्क था कि फैसलों के इस क्रम ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और क्या इन बदलावों से गड़बड़ियों की गुंजाइश बनी, इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री की ये बातें शिक्षकों के चयन और उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच को लेकर लगे आरोपों के बीच सामने आई हैं। उनकी हालिया पोस्ट का मकसद भर्ती नीति और उम्मीदवारों के दावों की जांच, दोनों ही मामलों में नायडू सरकार को बचाव की मुद्रा में लाना है।
जगन ने फिर कहा कि अगर कथित गड़बड़ियों से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई है, तो नायडू को "नैतिक जिम्मेदारी" लेनी चाहिए।
--आईएएनएस
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