जींद, 19 सितंबर (आईएएनएस)। हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई राजनीतिक दल कमजोर होता है तो वह अपनी स्थिति के लिए दूसरों पर आरोप लगाने लगता है। इसके साथ ही, उन्होंने पंजाब चुनाव, हरियाणा में अपराध और नशे के खिलाफ अभियान और धर्म को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी पर भी अपनी बात रखी।
भाजपा और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी कमजोर हो चुकी है और उसकी दिशा स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस के पास न तो स्पष्ट नीति है और न ही प्रभावी नेतृत्व। किसी राजनीतिक दल का राष्ट्रीय नेतृत्व कमजोर होने और जनता का विश्वास कम होने पर उस दल के सामने राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती हैं। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक हालात को इसी संदर्भ में बताया और कहा कि पार्टी का भविष्य उसके नेतृत्व और जनता के विश्वास पर निर्भर करता है।
2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर बडोली ने दावा किया कि राज्य में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भरोसा जताते हुए पंजाब की जनता भाजपा का समर्थन करेगी। पंजाब के लोग मौजूदा सरकार से बदलाव चाहते हैं और चुनाव नजदीक आने पर राज्य के राजनीतिक माहौल में बदलाव दिखाई देगा।
हरियाणा में अपराध को लेकर बड़ौली ने कहा कि राज्य में अपराध करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की जा रही है तथा कुछ मामलों में पुलिस मुठभेड़ भी हुई हैं।
युवाओं को नशे से दूर रखने के सवाल पर उन्होंने नमो क्रिकेट लीग जैसी खेल गतिविधियों का जिक्र किया। बड़ौली ने कहा कि युवाओं को खेलों से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें नशे और आपराधिक गतिविधियों से दूर रखना है। युवाओं को नशे की ओर आकर्षित करने या बरगलाने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की धर्म संबंधी टिप्पणी पर बड़ौली ने कहा कि धर्म का महत्व केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति और व्यक्ति के जीवन में भी धर्म की भूमिका हो सकती है। धर्म की व्यापक व्याख्या और परिभाषा है, जिसे समझने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, धर्म को केवल किसी एक संकीर्ण अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसके व्यापक सामाजिक और नैतिक संदर्भ को भी समझना जरूरी है।
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