शिमला, 1 सितंबर (आईएएनएस)। पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे जमीन पर कब्जा करने वालों को बड़ा झटका देते हुए, हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मंगलवार को 'हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया।
बिल के अनुसार, अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी या 'शामिलात' (गांव की साझा जमीन) पर गैर-कानूनी कब्जा करता है, तो उनकी बहू को भी चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा।
पिछले पंचायत चुनावों में, कई गैर-कानूनी कब्जा करने वालों ने कानून की इस तकनीकी खामी का खूब फायदा उठाया था।
खुद चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित होने पर नेता पंचायत प्रधान, ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी (बीडीसी) सदस्य या जिला परिषद सदस्य के पदों के लिए अपनी बहुओं को चुनावी मैदान में उतारते थे और परोक्ष रूप से शासन करते थे।
बहू परिवार का हिस्सा होती है और सीधे या परोक्ष रूप से कब्जे का फायदा उठाती है, इसलिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब इस खामी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने यह बिल पेश किया।
असल में, पुराने पंचायती राज अधिनियम (1994) के तहत कब्जा करने वाले के परिवार की परिभाषा में केवल दादा-दादी/नाना-नानी, माता-पिता, जीवनसाथी, बेटा और अविवाहित बेटी शामिल थे। इस सूची में बहू का जिक्र नहीं था।
सरकार ने इस संबंध में 6 मई को एक अध्यादेश जारी किया था। अब, यह बिल विधानसभा में उस अध्यादेश की जगह लेगा।
नए संशोधन के तहत, कब्जा करने वाले (फायदा उठाने वाले) की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब, अगर कोई उम्मीदवार या उनके परिवार का कोई सदस्य, जिसमें बहू भी शामिल है, जमीन पर कब्जा करने का दोषी पाया जाता है, तो उन्हें कब्जा छोड़ने या बेदखल किए जाने की तारीख से छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। उनकी उम्मीदवारी भी रद्द कर दी जाएगी।
अधिनियम की धारा 122 के तहत, जमीन पर कब्जा करने से संबंधित प्रावधान के अलावा, कुछ कड़े नियमों के आधार पर उम्मीदवारों को अयोग्य माना जाएगा।
अयोग्यता के आधारों में ड्रग तस्करी के लिए एनडीपीएस अधिनियम (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के तहत अदालत में लंबित मामले; पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद को देय कर, शुल्क या बकाया राशि का भुगतान न करना; पंचायत या सरकारी उपक्रमों के साथ किसी भी प्रकार की नौकरी (नियमित, पार्ट-टाइम, दिहाड़ी या अनुबंध पर) करना; नामांकन पत्रों में गलत जानकारी या गलत घोषणा देना; शामिल हैं।
वहीं, चुनाव से जुड़े अपराधों, गलत तरीकों या नैतिक रूप से गलत आचरण वाले अपराधों के लिए दोषी ठहराए जाने पर, जिसमें छह साल तक की सजा हो सकती है, भी शामिल हैं।
बिल के अनुसार, अगर किसी उम्मीदवार की अयोग्यता को लेकर कोई शिकायत या सवाल उठता है, तो संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
इसके बाद, राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी राज्य चुनाव आयोग से सलाह-मशविरा करके इस मामले पर फैसला करेगा।
--आईएएनएस
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