हरियाणा: एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत हुई 96 प्रतिशत गांवों की डिजिटल मैपिंग

हरियाणा: एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत हुई 96 प्रतिशत गांवों की डिजिटल मैपिंग

चंडीगढ़, 18 जून (आईएएनएस)। हरियाणा ने एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत 1.75 करोड़ कृषि भू-खंडों और लगभग 96 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भन (जियो-रेफरेंसिंग) कर दिया है। साथ ही 11.58 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया गया है और 8.32 लाख किसान पहचान दस्तावेज तैयार किए गए हैं। शेष गांवों को अगले दो महीनों के भीतर कवर किए जाने की उम्मीद है।

इन जानकारियों की समीक्षा गुरुवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में की गई।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि एग्रीस्टैक पहल किसानों का रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व संबंधी जानकारी और फसल से जुड़े आंकड़ों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर पारदर्शी और डाटा आधारित कृषि प्रशासन की नींव तैयार कर रही है। यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाने, दोहराव कम करने और कल्याणकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

बैठक में बताया गया कि राज्य के 7100 गांवों में से 6,808 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग हो चुकी है, जो कुल 95.89 प्रतिशत कवरेज है। यह डिजिटल मैपिंग राज्य में प्रस्तावित डिजिटल फसल सर्वेक्षण और प्रमाणित किसान रजिस्ट्री तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है।

वित्तायुक्त (राजस्व) सुमिता मिश्रा ने बताया कि किसान रजिस्ट्री के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया को राज्यभर के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से तेज किया जा रहा है। अब जब ये केंद्र सक्रिय रूप से पंजीकरण कर रहे हैं, तो आने वाले दिनों में किसानों के नामांकन की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित सत्यापन मामलों का जल्द निपटारा किया जाए और मिशन मोड में सभी भूमि रिकॉर्ड को मौजूदा तथा नए किसान पहचान पत्रों से जोड़कर किसान रजिस्ट्री को पूरी तरह तैयार किया जाए। उन्होंने समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने के लिए जिला स्तर पर मजबूत निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।

बैठक में खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह सर्वेक्षण राज्य के 23 जिलों में सभी जियो-रेफरेंस किए गए भूखंडों को कवर करेगा। इस अभियान में लगभग 6,500 सर्वेक्षक शामिल होंगे और इसकी शुरुआत इस वर्ष अगस्त में होने की संभावना है।

अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध करीब 1.75 करोड़ किसान रिकॉर्ड का उपयोग किसान रजिस्ट्री का दायरा बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसमें उन किसानों को भी शामिल किया जाएगा जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के लाभार्थी नहीं हैं।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि भूमि रिकॉर्ड, फसल संबंधी आंकड़ों और किसान डेटाबेस के एकीकरण से कृषि क्षेत्र के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार होगा, जिससे तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी