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हरेकला हजब्बा को जारी नोटिस पर कर्नाटक सीईओ का स्पष्टीकरण, नाम की गड़बड़ी हुई दूर

हरेकला

बेंगलुरु, 8 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पद्मश्री सम्मानित हरेकला हजब्बा को जारी किया गया नोटिस मतदाता अभिलेखों में उनके नाम से जुड़ी विसंगति के कारण भेजा गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले का अब समाधान कर लिया गया है।

सीईओ ने बताया कि नोटिस केवल मतदाता सूची में दर्ज नाम और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच असंगति को दूर करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के बाद समस्या का समाधान कर दिया गया है और अब मामला पूरी तरह सुलझ चुका है।

सीईओ ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में मंगलुरु के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) द्वारा हजब्बा के नाम में सुधार के संबंध में जारी स्पष्टीकरण को साझा किया।

डीईओ ने कहा, "पद्मश्री से सम्मानित हरेकला हजब्बा के नाम में सुधार के मामले में यह स्पष्ट किया जाता है कि मतदाता के नाम में अंतर पाया गया था। उनके नाम को सही करने के लिए अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और दस्तावेज एकत्र किए। अब यह मामला सुलझा लिया गया है।"

यह स्पष्टीकरण तब आया जब चुनाव अधिकारियों ने हजब्बा को नोटिस भेजकर दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा था, क्योंकि मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नाम और पिछली एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दर्ज नाम में अंतर था।

उनके आवास पर जारी नोटिस में हजब्बा को अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ चुनाव अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। उन्हें 11 सितंबर को हरेकला ग्राम पंचायत में उपस्थित होने के लिए कहा गया था।

हालांकि, नोटिस मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर, ग्राम लेखाकार हजब्बा के आवास पर वापस आए और नोटिस वापस ले लिया। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके नाम में जो अंतर है, उसे ठीक कर दिया जाएगा।

इस घटनाक्रम ने मंगलुरु में आश्चर्य पैदा कर दिया था क्योंकि हजब्बा अपने सामाजिक कार्यों और मंगलुरु में संतरे बेचकर कमाए गए पैसे से अपने पैतृक गांव हरेकला में एक स्कूल बनाने के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

हजब्बा के अनुसार, 2000 से पहले दस्तावेजों में उनका नाम केवल "हजब्बा" दर्ज था। स्कूल बनाने के उनके प्रयासों को व्यापक पहचान मिलने के बाद "हरेकला हजब्बा" वह नाम बन गया जिससे उन्हें आमतौर पर जाना जाने लगा।

उन्होंने कहा कि उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में "हरेकला हजब्बा" नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि यही नाम उनके पद्मश्री अवॉर्ड, कर्नाटक राज्योत्सव अवॉर्ड और डॉक्टरेट सर्टिफिकेट में भी लिखा है।

हजब्बा ने पहले बताया था कि उन्हें दोपहर के आसपास एसआईआर नोटिस मिला था और जरूरी दस्तावेज दिखाने को कहा गया था। उन्होंने बताया कि दो आंगनवाड़ी टीचर नोटिस लेकर आई थीं और उन्होंने नोटिस मिलने के सबूत के तौर पर एक फोटो लेने को कहा था।

बाद में, शाम करीब 5 बजे विलेज अकाउंटेंट ने उनसे संपर्क किया और कहा कि एक छोटी सी गलती हो गई है और उनसे नोटिस वापस करने को कहा। इसके बाद अधिकारी उनके घर आए और नोटिस वापस ले लिया। साथ ही भरोसा दिलाया कि अधिकारी रिकॉर्ड ठीक कर देंगे। हजब्बा ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह गड़बड़ी ठीक हो जाएगी और वोटर लिस्ट में उनका नाम सही कर दिया जाएगा।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी