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'हीरोइन ऑफ हाइजैक' : एयर होस्टेस नीरजा भनोट ने अपनी जान देकर बचाई थी 360 यात्रियों की जिंदगी

हीरोइन ऑफ हाइजैक

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। अपने जन्मदिन से दो दिन पहले 5 सितंबर 1986 को पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुईं नीरजा भनोट आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। नीरजा भनोट ने 360 यात्रियों की जान बचाकर बहादुरी की मिशाल पेश की थी। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। वह यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की महिला बनीं। नीरजा अपनी वीरता की वजह से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 'हीरोइन ऑफ हाईजैक' के रूप में मशहूर हुईं।

नीरजा का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था। इनके पिता हरीश भनोट बंबई (अब मुंबई) में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत थे और नीरजा की प्रारंभिक शिक्षा अपने गृहनगर चंडीगढ़ के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। इसके बाद उनकी शिक्षा बंबई के स्कोटिश स्कूल और सेंट जेवियर्स कॉलेज में हुई।

नीरजा का विवाह वर्ष 1985 में संपन्न हुआ और वे पति के साथ खाड़ी देश चली गईं लेकिन कुछ दिनों के बाद दहेज के दबाव को लेकर इस रिश्ते में खटास आई और दो महीने बाद ही वह वापस मुंबई आ गईं। इसके बाद नीरजा ने पैन एम एयरलाइंस में एयर होस्टेस की नौकरी शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने मॉडलिंग और एंटी-हाईजैकिंग कोर्स भी कम्पलीट किया।

5 सितंबर 1986 को बंबई से न्यूयॉर्क के लिए पैन एम फ्लाइट 73 ने उड़ान भरी थी। इस उड़ान में फ्लाइट का पहला पड़ाव पाकिस्तान के कराची के जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर था। यहां पर कुछ यात्री उतरे और कुछ सवार हुए। विमान उड़ने की ही तैयारी कर रहा था कि अबू निदाल ग्रुप के चार सशस्त्र आतंकवादियों ने विमान को हाईजैक कर लिया। आतंकवादियों का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी जेलों में बंद फिलीस्तानी कैदियों को रिहा कराना था। आतंकी फ्लाइट को साइप्रस ले जाना चाहते थे। नीरजा उस विमान में सीनियर पर्सर के रूप में नियुक्त थीं और उन्होंने तुरंत सूझबूझ का परिचय देते हुए कॉकपिट क्रू को सतर्क कर दिया, जिससे पायलट और फ्लाइट इंजीनियर भागने में सफल रहे और विमान उड़ान नहीं भर सका।

इसके बाद विमान में सबसे वरिष्ठ विमानकर्मी के रूप में यात्रियों की जिम्मेदारी नीरजा के ऊपर थी। आतंकवादियों ने फ्लाइट को 17 घंटों तक हाईजैक रखा। जब रात को बिजली डिस्चार्ज होने लगी तो आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इससे पहले एक भारतीय अमेरिकी नागरिक को गोली मार दी थी। ​जब आतंकवादियों ने अमेरिकी नागरिकों की पहचान के लिए पासपोर्ट मांगे, तो नीरजा ने चालाकी से अमेरिकी पासपोर्ट छिपा दिए ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू किए तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हो गईं और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैया कराया।

वे चाहतीं तो दरवाजा खोलते ही खुद पहले कूदकर निकल सकती थीं लेकिन उन्होंने ऐसा न करके पहले यात्रियों को निकलने का प्रयास किया। उन्होंने लगभग 360 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। जब वह तीन बच्चों को निकाल रही थीं तो आतंकवादियों ने देख लिया और उन्हें गोली मार दी। गोली लगने से पहले नीरजा ने अधिकतर यात्रियों को बाहर निकाल दिया था, तब तक पाकिस्तानी कमांडो ने भी विमान में घुसकर आतंकियों को पकड़ लिया था। इस विमान में सवार 380 में से 360 की जान नीरजा की वजह से बच पाई थी।

नीरजा भनोट को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से सम्मानित किया गया। वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति थीं। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तान द्वारा 'तमगा-ए-इंसानियत' और अमेरिका द्वारा भी वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरजा भनोट का नाम हीरोइन ऑफ हाईजैक के तौर पर मशहूर है। वर्ष 2004 में नीरजा के सम्मान में भारत सरकार ने एक डाक टिकट जारी किया। अमेरिका ने वर्ष 2005 में उन्हें जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड दिया। नीरजा भनोट पर फिल्म बन चुकी है। 2016 में रिलीज हुई फिल्म में नीरजा का किरदार सोनम कपूर ने निभाया है।

--आईएएनएस

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